Vikas Khemani बने APMI के नए चेयरमैन, बनाएंगे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट इंडस्ट्री को और पारदर्शी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Vikas Khemani बने APMI के नए चेयरमैन, बनाएंगे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट इंडस्ट्री को और पारदर्शी

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट इंडस्ट्री (PMS) में एक बड़ा बदलाव हुआ है। Carnelian Asset Management के Vikas Khemani को एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (APMI) का नया चेयरमैन चुना गया है। उनके साथ Sandeep Jethwani वाइस-चेयरमैन होंगे। यह नई लीडरशिप इंडस्ट्री में पारदर्शिता (transparency) और टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर ज़ोर देगी, जिसका लक्ष्य 30 जून 2026 तक **₹43.3 लाख करोड़** की एसेट्स को सपोर्ट करना है।

APMI को मिली नई लीडरशिप

एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (APMI) ने अपने नए नेतृत्व की घोषणा कर दी है। Vikas Khemani, जो Carnelian Asset Management & Advisors का नेतृत्व करते हैं, अब APMI के चेयरमैन का पद संभालेंगे। वहीं, Dezerv के Sandeep Jethwani को वाइस-चेयरमैन बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) का सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। 30 जून 2026 तक इस सेक्टर के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का आंकड़ा ₹43.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

APMI, SEBI-रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए एक प्रमुख संस्था है। यह इंडस्ट्री और मार्केट रेगुलेटर्स के बीच एक पुल का काम करती है। नई लीडरशिप का लक्ष्य ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स, गवर्नेंस और व्यक्तिगत निवेशकों के लिए पारदर्शिता को बेहतर बनाना है। यह नियुक्ति निवेशकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि APMI इंडस्ट्री के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेज और स्टैंडर्ड्स तय करती है, जिनका पालन पोर्टफोलियो मैनेजर्स को करना होता है।

टेक्नोलॉजी और पारदर्शिता पर फोकस

Vikas Khemani, जिनके फर्म की इक्विटी-केंद्रित रणनीतियों के लिए जानी जाती है, और Sandeep Jethwani, जिनके Dezerv प्लेटफॉर्म का डिजिटल-फर्स्ट मॉडल है, दोनों का अनुभव इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद होगा। इन नियुक्तियों से यह साफ है कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए टेक्नोलॉजी को एकीकृत करने पर जोर दिया जाएगा, खासकर हाई-नेट-वर्थ इन्वेस्टर्स के बढ़ते समुदाय के लिए।

PMS सेक्टर में तेजी और चुनौतियां

हाल के वर्षों में PMS सेक्टर ने काफी तरक्की की है। 2020 के बाद से SEBI-रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। इस तेज विस्तार के साथ कुछ चुनौतियां भी आई हैं, जैसे स्टैंडर्डाइज्ड रिपोर्टिंग और निवेशकों के साथ स्पष्ट संचार की जरूरत। APMI के स्टैंडर्ड्स निवेशकों को विभिन्न निवेश रणनीतियों से जुड़े जोखिमों को समझने और यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेटरी आवश्यकताओं का पालन कर रहे हैं।

भविष्य की राह

हालांकि APMI सीधे तौर पर फंड्स का प्रबंधन नहीं करती या स्टॉक मार्केट का जोखिम नहीं उठाती, लेकिन इसके द्वारा समर्थित नीतियां पोर्टफोलियो मैनेजर्स के काम करने के तरीके को सीधे प्रभावित करती हैं। नई टीम द्वारा वादा किया गया टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस पर फोकस भविष्य में ग्राहकों के लिए बेहतर डिजिटल रिपोर्टिंग टूल्स और अधिक स्पष्ट डिस्क्लोजर नॉर्म्स ला सकता है। निवेशकों को APMI बोर्ड द्वारा पेश किए जाने वाले किसी भी नए रेगुलेटरी गाइडलाइन्स या इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये परफॉर्मेंस डेटा रिपोर्टिंग और रणनीति में बदलावों के संचार को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.