उत्तर प्रदेश सरकार के 'BC Sakhi' कार्यक्रम ने ग्रामीण बैंकिंग में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इस पहल के तहत राज्य भर में अब तक **4.58 लाख करोड़ रुपये** से ज्यादा के ट्रांजेक्शन हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार के 'उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' द्वारा शुरू की गई 'BC Sakhi' (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी) पहल ग्रामीण भारत में वित्तीय सेवाओं के विकेंद्रीकरण का एक बड़ा उदाहरण बन गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बैंक शाखाओं तक न पहुंच पाने वाले सुदूर ग्रामीण इलाकों में लोगों के दरवाजे तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना है।
कैसे काम करता है यह मॉडल?
'एक ग्राम पंचायत, एक BC सखी' की रणनीति के तहत, राज्य में अब 40,000 से अधिक सक्रिय BC सखियां बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इन महिलाओं को 'रूरल सेल्फ एंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट' में प्रशिक्षित किया जाता है और 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस' से प्रमाणित होने के बाद ही वे काम शुरू करती हैं। सरकार की ओर से शुरुआत के 6 महीनों तक ₹4,000 का स्टाइपेंड और उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।
कमाई और चुनौतियां
BC सखियों की कमाई मुख्य रूप से उनके द्वारा किए गए ट्रांजेक्शन पर मिलने वाले कमीशन पर निर्भर करती है। हालांकि यह प्रोग्राम हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का जरिया बना है, लेकिन उनकी आय सीधे स्थानीय डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या से जुड़ी है।
इस योजना की लंबी अवधि की सफलता के लिए कुछ प्रमुख कारक अनिवार्य हैं:
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: निर्बाध इंटरनेट और बिजली की आपूर्ति ट्रांजेक्शन के लिए बेहद जरूरी है।
- डिजिटल साक्षरता: दूर-दराज के गांवों में लोगों को डिजिटल बैंकिंग के प्रति जागरूक करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
- साइबर सुरक्षा: छोटे स्तर पर होने वाले डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा बनाए रखना सरकार और इन सखियों के लिए एक निरंतर चुनौती बनी हुई है।
जैसे-जैसे सरकारी स्टाइपेंड का दौर समाप्त होगा और ये सखियां पूरी तरह से कमीशन-आधारित मॉडल पर शिफ्ट होंगी, वैसे-वैसे उनके आय मॉडल की स्थिरता पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
