मुनाफे पर बड़ा दबाव, लोन बुक में सिकुड़न
Utkarsh Small Finance Bank को Q3 FY26 के लिए ₹375 करोड़ का भारी नेट लॉस हुआ है। यह पिछले साल की समान अवधि में हुए ₹168 करोड़ के घाटे से कहीं ज्यादा है। बैंक के नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) में भी 27.5% की भारी गिरावट आई, जो घटकर ₹348 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹480 करोड़ था। यह दिखाता है कि बैंक के मुख्य कमाई के जरियों पर दबाव है।
### ऑपरेशनल एफिशिएंसी का बुरा हाल
ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) के मामले में भी स्थिति खराब है। बैंक का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो (Cost-to-Income Ratio) बढ़कर 110.3% हो गया है, जिसका मतलब है कि परिचालन खर्च आमदनी से ज्यादा हो गया। इसके अलावा, एसेट्स पर निगेटिव रिटर्न (-5.4%) और शेयरधारकों की पूंजी पर निगेटिव रिटर्न (-55.9%) बॉटम लाइन पर चल रहे दबाव को साफ दिखाते हैं।
### शेयर टूटा, वैल्यूएशन गिरा
बाजार ने भी इस प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पिछले एक साल में Utkarsh Small Finance Bank का शेयर करीब 54.99% टूट चुका है। फरवरी 2026 की शुरुआत में बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹2,429 करोड़ था, और शेयर ₹13.6 पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके 52-हफ्ते के हाई ₹32.85 से काफी नीचे है। स्टॉक का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो नेगेटिव है, जो इसकी वर्तमान घाटे वाली स्थिति को दर्शाता है।
### साथियों से पिछड़ रहा Utkarsh SFB
इसकी तुलना में, AU Small Finance Bank जैसे अन्य स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। AU SFB ने Q3 FY26 में ₹667.6 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, वहीं Equitas Small Finance Bank का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स ₹90 करोड़ रहा। AU SFB का मार्केट कैप ₹73,000 करोड़ से भी ज्यादा है, जबकि Utkarsh SFB का वैल्यूएशन ₹2,400 करोड़ के आसपास सिमट गया है।
### लोन बुक में रणनीतिक बदलाव
इन नतीजों का एक मुख्य कारण बैंक की लोन बुक में किया गया रणनीतिक बदलाव है। जोखिम को मैनेज करने के लिए, Utkarsh SFB ने नए लोन बांटने की रफ्तार धीमी कर दी है। इसके चलते, दिसंबर 2025 के अंत तक बैंक की कुल लोन बुक 3.9% घटकर ₹18,306 करोड़ रह गई। इस गिरावट की बड़ी वजह ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) लोन पोर्टफोलियो में 34.1% की कमी है। बैंक ने कलेक्शन पर ध्यान केंद्रित किया है। वहीं, नॉन-JLG लोन पोर्टफोलियो 27.5% बढ़ा है, जिसमें MSME लोन, हाउसिंग फाइनेंस और गोल्ड लोन जैसे सुरक्षित उत्पादों पर जोर दिया गया है। माइक्रो-बैंकिंग बिजनेस लोन (MBBL) सेगमेंट ने भी 80% की जोरदार ग्रोथ दर्ज की है।
### एसेट क्वालिटी में सुधार और कैपिटल बूस्ट
घाटे के बावजूद, बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में कुछ राहत के संकेत दिखे हैं। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) पिछले क्वार्टर के 12.42% से घटकर 11.05% हो गए हैं, और नेट NPAs भी 5.02% से कम होकर 4.48% पर आ गए हैं। यह बेहतर कलेक्शन एफिशिएंसी का संकेत देता है। लायबिलिटी साइड पर, कुल डिपॉजिट्स 4.5% बढ़कर ₹21,087 करोड़ हो गए हैं। रिटेल टर्म डिपॉजिट्स में 23.8% की अच्छी ग्रोथ देखी गई। बैंक ने नवंबर 2025 में राइट्स इश्यू (Rights Issue) के जरिए लगभग ₹950 करोड़ जुटाकर अपनी कैपिटल बेस को भी मजबूत किया है।
### सेक्टर का मिजाज और आगे की राह
समग्र रूप से, भारतीय स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) सेक्टर अभी मिले-जुले माहौल में है। SFBs से FY26 में लोन बुक में 18-20% की ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में एसेट क्वालिटी की चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षित लेंडिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। RBI की ओर से रेगुलेटरी नियमों के सख्त होने की भी उम्मीद है। Utkarsh SFB की JLG लोन से दूरी बनाने और सुरक्षित उत्पादों पर फोकस करने की रणनीति सेक्टर के रुझानों के अनुरूप है, लेकिन इस ट्रांजीशन फेज में नियर-टर्म परफॉर्मेंस पर असर दिखना स्वाभाविक है।