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Utkarsh SFB: ₹1,491 करोड़ के डूबे कर्ज़ 13% पर बेचे, बैंक को भारी घाटा!

BANKINGFINANCE
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AuthorNeha Patil|Published at:
Utkarsh SFB: ₹1,491 करोड़ के डूबे कर्ज़ 13% पर बेचे, बैंक को भारी घाटा!
Overview

Utkarsh Small Finance Bank के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। बैंक ने **₹1,491 करोड़** के अपने स्ट्रेस्ड लोंस (Stressed Loans) या बैड लोंस (Bad Loans) का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ **₹195 करोड़** में बेच दिया है। यह रकम उन लोन की कुल वैल्यू का महज़ **13%** है। यह डील ऐसे समय में हुई है जब बैंक को पिछली तिमाही में **₹375 करोड़** का भारी नेट लॉस (Net Loss) हुआ है और ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो **11%** पर पहुंच गया है, जो इंडस्ट्री एवरेज से कहीं ज्यादा है।

एसेट क्वालिटी पर बड़ा सवाल, घाटे में हुई डील

Utkarsh Small Finance Bank ने ₹1,491 करोड़ के डूबे हुए कर्ज़ (Bad Loans) को ₹195 करोड़ में बेच दिया, जिससे उन्हें मूल रकम का सिर्फ 13% ही वापस मिला। यह डील बैंक की लोन बुक की क्वालिटी पर गंभीर सवाल खड़े करती है, खासकर माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में। इस सौदे का मकसद बैलेंस शीट को डी-रिस्क करना था, लेकिन यह बैंक की अंदरूनी दिक्कतों को उजागर करता है। दिसंबर 2025 में Utkarsh का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो 11% था, जो भारतीय बैंकिंग सेक्टर के 2.1%-2.15% के औसत से काफी ज्यादा है, और Utkarsh इस मामले में एक बड़ी चूक साबित हुआ।

डील की पूरी कहानी और भारी नुकसान

इस एसेट सेल में माइक्रोफाइनेंस से जुड़े दो बैड लोन के पूल शामिल थे। ₹1,016 करोड़ के एक पूल को, जो 2.92 लाख खातों से जुड़ा था, ARCIL को ₹133 करोड़ में बेचा गया। वहीं, ₹475 करोड़ का दूसरा पूल, जो 1.37 लाख खातों का था, Shriram Asset Reconstruction Pvt Ltd को ₹62 करोड़ में बेच दिया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि इन कर्जों में कितनी गिरावट आई थी और कितना बड़ा नुकसान हुआ। कुल ₹195 करोड़ की वसूली का मतलब है कि औसतन सिर्फ 13% रिकवरी हुई, जो दर्शाता है कि ये लोन कितने खराब हो चुके थे। रेग्युलेटरी नियमों को पूरा करने के लिए यह बड़ा राइट-डाउन (Write-down) किया गया, जो एक जरूरी कदम था लेकिन बैंक के ₹375 करोड़ के तीसरी तिमाही के नेट लॉस में इसने और इजाफा किया।

लगातार घाटा और बढ़ता खर्चा

Utkarsh Small Finance Bank की आर्थिक स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। बैंक ने Q3 FY26 में ₹375 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹168 करोड़ के लॉस से कहीं ज्यादा है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इसी तिमाही में ₹44 करोड़ का ऑपरेशनल लॉस (Operational Loss) हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹185 करोड़ का प्रॉफिट हुआ था। Q3 FY26 के लिए कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो (Cost-to-Income Ratio) बढ़कर 110.3% हो गया, जिसका मतलब है कि बैंक की ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Costs) उसकी कमाई से भी ज्यादा हो गई। लगातार हो रहे घाटे की वजह से बैंक का P/E रेश्यो (P/E Ratio) नेगेटिव है, जिससे इसकी वैल्यूएशन (Valuation) पर अनिश्चितता बनी हुई है। पिछले एक साल में शेयर की कीमत 40% से ज्यादा गिर चुकी है, जो निवेशकों की गहरी चिंता को दिखाता है।

सेक्टर की चुनौतियां और प्रतिस्पर्धी

Utkarsh के कई समस्याग्रस्त लोन माइक्रोफाइनेंस सेक्टर से आते हैं, जो फिलहाल मुश्किलों का सामना कर रहा है। FY2026 के लिए ग्रोथ 4% के आसपास रहने की उम्मीद है, जिसमें तेजी से विस्तार के बजाय पोर्टफोलियो क्वालिटी को मैनेज करने और स्थिर ग्राहकों को सेवा देने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस सेक्टर में बदलाव का मतलब है कि लोन की तेज ग्रोथ के मौके कम हो गए हैं। इसके विपरीत, AU Small Finance Bank जैसे प्रतिस्पर्धी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जो मजबूत डिपॉजिट और लोन ग्रोथ, अच्छे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) और लगातार प्रॉफिट दिखा रहे हैं। यह स्मॉल फाइनेंस बैंक इंडस्ट्री के भीतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और एसेट्स को मैनेज करने के अलग-अलग दृष्टिकोणों को दर्शाता है।

भविष्य की राह: रिकवरी के प्रयास

मैनेजमेंट ने लंबी अवधि की स्थिरता के लिए एक प्लान साझा किया है, जिसमें अगले दो से तीन सालों में लोन बुक ग्रोथ 25%-30% का लक्ष्य रखा गया है, और सिक्योरड लेंडिंग (Secured Lending) पोर्टफोलियो का 50% से ज्यादा हिस्सा होगी। FY28 तक नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) करीब 8.5% और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 15% रहने का अनुमान है, साथ ही क्रेडिट कॉस्ट (Credit Costs) कम होंगी। हालांकि, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी में बड़े सुधार की जरूरत है, जैसा कि ऊंचे कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो को कम करने की योजनाओं से पता चलता है। भले ही दो एनालिस्ट्स (Analysts) ने स्टॉक को 'Strong Buy' रेटिंग दी है और ₹20.00 का मीडियन टारगेट प्राइस (Median Target Price) तय किया है, जिससे संभावित बढ़त के संकेत मिलते हैं, लेकिन मौजूदा नेगेटिव कमाई और ऊंचे ऑपरेटिंग खर्चे निवेशक के भरोसे के लिए बड़ी बाधाएं हैं।

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