सेकेंड हैंड कार लोन का बूम! नई कारों को पीछे छोड़ा, पर इन जोखिमों पर रखें नज़र

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AuthorMehul Desai|Published at:
सेकेंड हैंड कार लोन का बूम! नई कारों को पीछे छोड़ा, पर इन जोखिमों पर रखें नज़र

भारत में यूज्ड कार फाइनेंस का पोर्टफोलियो जून 2026 तक **₹1.3 लाख करोड़** तक पहुंच गया है, जो नई कारों के फाइनेंस से कहीं तेज़ी से बढ़ रहा है। हालांकि, इस बढ़ते कर्ज़ के साथ ज़्यादा डिफ़ॉल्ट (Default) और असुरक्षित कर्ज़ के बढ़ते इस्तेमाल का जोखिम भी है।

भारत में पुरानी गाड़ियों के फाइनेंसिंग में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला है। जून 2026 तक यह पोर्टफोलियो बढ़कर ₹1.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले पांच सालों में, इस सेगमेंट में सालाना 26.2% की दर से ग्रोथ देखी गई है, जो नई ऑटो लोन की 17.6% की ग्रोथ से काफी ज़्यादा है। यह दिखाता है कि भारतीय ग्राहक पुरानी कारें खरीदने के लिए फॉर्मल फाइनेंस चैनलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे ऑटो फाइनेंस इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आ रहा है।

ये जोखिम क्यों मायने रखता है?

जहां यह ग्रोथ ज़्यादा लोगों तक क्रेडिट पहुंचने का संकेत है, वहीं इसमें कुछ खास जोखिम भी हैं जिन्हें निवेशकों को समझना चाहिए। डेटा के मुताबिक, यूज्ड कार सेगमेंट में नई ऑटो लोन की तुलना में ज़्यादा तनाव (Stress) देखा जा रहा है। उदाहरण के लिए, यूज्ड कार फाइनेंसिंग में शुरुआती डिफ़ॉल्ट (Early-stage delinquencies), यानी लोन की तय तारीख से 31 से 90 दिन लेट होने वाले मामले, 3.1% हैं। वहीं, नई ऑटो लोन में यह आंकड़ा केवल 2.1% है।

बरोअर प्रोफाइल का खेल

इन दोनों सेगमेंट के बीच क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) का अंतर बरोअर की प्रोफाइल से जुड़ा है। लेंडर्स (Lenders) अक्सर देखते हैं कि यूज्ड कार सेगमेंट के बरोअर्स के पास पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड या कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन जैसे कई असुरक्षित कर्ज़ (Unsecured Loans) होने की संभावना ज़्यादा होती है। यूज्ड कार बरोअर्स में लगभग 9.2% लोग ऐसे असुरक्षित कर्ज़ों से जुड़े हैं, जबकि नई ऑटो लोन कैटेगरी में यह आंकड़ा सिर्फ 6.4% है।

खासकर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) और बैंकों के लिए, जो यूज्ड कार सेगमेंट में आक्रामक हैं, इसका मतलब है कि उन्हें क्रेडिट क्वालिटी (Credit Quality) पर कड़ी नज़र रखनी होगी। असुरक्षित कर्ज़ पर ज़्यादा निर्भरता इन बरोअर्स को फाइनेंशियल झटकों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाती है, जिससे अगर आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण हो जाए तो डिफ़ॉल्ट (Default) बढ़ सकते हैं।

सेक्टर का हाल और निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें

यूज़्ड कार सेगमेंट में कुछ तनाव के बावजूद, 'व्हील्स फाइनेंस' इंडस्ट्री, जिसमें टू-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल शामिल हैं, स्थिर दिख रही है। कमर्शियल व्हीकल फाइनेंस मार्केट में भी ज़बरदस्त डिमांड देखी गई, जो सालाना 20.1% बढ़कर जून 2026 तक ₹7.4 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

निवेशकों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए, सिर्फ पोर्टफोलियो की टॉप-लाइन ग्रोथ ही नहीं, बल्कि अंडरराइटिंग क्वालिटी (Underwriting Quality) पर भी नज़र रखना ज़रूरी है। पुरानी गाड़ियों के मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, लेंडर्स मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए अपने लेंडिंग स्टैंडर्ड्स (Lending Standards) को कम करने का लालच दे सकते हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या लेंडर्स अपने बैड लोन (Bad Loans) को ज़्यादा बढ़ाए बिना अपने प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) को बनाए रख पाते हैं।

भविष्य में, इस ग्रोथ की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि लेंडर्स अपने बुक को बढ़ाने और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को बनाए रखने के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। प्रमुख वाहन फाइनेंसर्स से एसेट क्वालिटी, कलेक्शन एफिशिएंसी (Collection Efficiency) और नए लोन के बरोअर प्रोफाइल पर आने वाले अपडेट्स से यह और स्पष्ट होगा कि क्या यह सेगमेंट एक लाभदायक ग्रोथ इंजन बना रहेगा या क्रेडिट रिस्क का बढ़ता हुआ क्षेत्र बन जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.