Unsecured Business Loan Defaults: बैंकों की बदली रणनीति, अब ग्रोथ से ज्यादा क्वालिटी पर जोर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Unsecured Business Loan Defaults: बैंकों की बदली रणनीति, अब ग्रोथ से ज्यादा क्वालिटी पर जोर

अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन में डिफॉल्ट की दर बढ़कर **5-6%** पहुंच गई है, जिससे बैंक अब क्रेडिट मानकों को सख्त करने पर मजबूर हो गए हैं। हालांकि बैंकिंग सिस्टम स्थिर है, लेकिन MSME सेक्टर में **25%** की तेजी के बाद अब सुस्ती के संकेत मिल रहे हैं।

बैंकिंग और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल सेक्टर (NBFC) में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अनसिक्योर्ड लोन सेगमेंट में बढ़ते दबाव को देखते हुए लेंडर्स अपनी रणनीति बदल रहे हैं। भले ही बैंकिंग सेक्टर का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो 2% से नीचे बना हुआ है, लेकिन कुछ खास पोर्टफोलियो में रीपेमेंट में देरी चिंता का विषय बन रही है।

ग्रोथ बनाम क्वालिटी की जंग

पिछले एक साल में बैंकों ने MSME लोन बांटने में काफी आक्रामकता दिखाई थी, जो जून तक 25% की रफ्तार से बढ़ रहा था। यह ग्रोथ अन्य क्रेडिट कैटेगरी के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। लेकिन अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है क्योंकि लोन डिफॉल्ट रेट बढ़कर 5% से 6% तक पहुंच गए हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि अब बैंकों का फोकस वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय एसेट की क्वालिटी सुधारने पर होगा।

क्यों दबाव में हैं MSME पोर्टफोलियो?

छोटे कारोबारियों के लिए मौजूदा दौर चुनौतीपूर्ण है। इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन की दिक्कतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर MSME की कैश फ्लो पर पड़ा है। अनसिक्योर्ड लोन पूरी तरह से उधारकर्ता की कमाई पर निर्भर होते हैं, क्योंकि इनमें कोई कोलैटरल (गिरवी) नहीं होता। ऐसे में अर्थव्यवस्था में थोड़ी भी हलचल होने पर इनका परफॉर्मेंस बिगड़ जाता है।

सिस्टम मजबूत, फिर भी सावधानी जरूरी

भारतीय बैंकिंग सिस्टम की सेहत अभी भी अच्छी है। RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक बैंकों का ग्रॉस NPA रेशियो 1.8% पर था। यानी रिस्क अभी एक सीमित सेगमेंट तक ही है। बैंक पहले से ही अपने रिस्क को कम करने के लिए अनसिक्योर्ड रिटेल और माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो को डी-लीवरेज कर रहे हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि बैंक अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) और प्रोविजनिंग को कैसे मैनेज करते हैं। क्रेडिट रिस्क कम करने के लिए बैंकों की ओर से ब्याज दरों और लोन बांटने के तरीकों में बदलाव देखने को मिल सकता है। अगली तिमाही के नतीजों में एसेट क्वालिटी और क्रेडिट कॉस्ट पर मैनेजमेंट की कमेंट्री अहम होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.