Unity Small Finance Bank (SFB) की अधिकृत शेयर पूंजी (authorized share capital) बढ़ाने की योजना को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला बैंक के शेयरधारकों BharatPe और Centrum Financial Services के बीच चल रहे एक बड़े विवाद के चलते आया है। BharatPe ने इस कदम का विरोध किया था, क्योंकि उन्हें डर है कि वारंट (warrants) के रूपांतरण पर उनकी हिस्सेदारी 49% से घटकर 21% हो सकती है।
Detailed Coverage
शेयरधारकों के बीच जंग: BharatPe और Centrum आमने-सामने
Unity Small Finance Bank में दो मुख्य शेयरधारकों, BharatPe और Centrum Financial Services, के बीच बैंक की कैपिटल स्ट्रक्चर को लेकर तनातनी चल रही है। इसी बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने बैंक की अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। इस फैसले से BharatPe को कुछ राहत मिली है, जिसने इस कदम का औपचारिक तौर पर विरोध किया था।
स्टेक डाइल्यूशन (Stake Dilution) का पूरा मामला
यह विवाद बैंक द्वारा अक्टूबर 2021 में जारी किए गए वारंट से जुड़ा है, जो अक्टूबर 2026 में एक्सपायर होंगे। इन वारंट को शेयरों में बदलने के लिए बैंक की अधिकृत पूंजी को बढ़ाना जरूरी है। BharatPe, जिसकी वर्तमान में बैंक में 49% हिस्सेदारी है, का तर्क है कि इस रूपांतरण से उनकी हिस्सेदारी काफी कम होकर लगभग 21% रह जाएगी। BharatPe के वकीलों ने यह भी चिंता जताई है कि इससे फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत विदेशी निवेश नियमों के साथ जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
दूसरी ओर, Centrum Financial Services का कहना है कि यह डाइल्यूशन BharatPe के खुद पिछली कैपिटल इन्फ्यूजन राउंड (capital infusion rounds) में हिस्सा न लेने के फैसले का नतीजा है। Centrum का दावा है कि BharatPe को अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में वारंट सब्सक्राइब करने का मौका दिया गया था। यह रूपांतरण वारंट से कम्पलसरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (compulsory convertible preference shares) में होगा, जो अंततः बैंक के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लॉन्च करने से पहले इक्विटी (equity) में बदल जाएंगे।
बैंक का ऑपरेशनल स्टेटस और रेगुलेटरी स्थिति
अपने प्रमुख शेयरधारकों के बीच इस खींचतान के बावजूद, Unity Small Finance Bank का कहना है कि उसके रोजमर्रा के कामकाज (day-to-day operations) स्थिर हैं। बैंक की वित्तीय सेहत की बात करें तो, इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) करीब 26% है। यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा अनिवार्य न्यूनतम 15% से काफी ज्यादा है, जो दर्शाता है कि बैंक के पास फिलहाल पर्याप्त पूंजी है। इससे पता चलता है कि प्रस्तावित पूंजी वृद्धि शायद किसी तत्काल फंड की कमी को पूरा करने के बजाय एक दीर्घकालिक रणनीतिक कदम था।
Unity Small Finance Bank, Centrum Financial Services और BharatPe की पेरेंट कंपनी Resilient Innovations के बीच एक ज्वाइंट वेंचर के तौर पर स्थापित हुई थी। यह तब हुआ था जब RBI ने पूर्व PMC बैंक की संपत्ति के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी थी। अपनी लंबी अवधि की रेगुलेटरी प्रतिबद्धता के तहत, BharatPe को 2029 तक बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 10% करनी होगी।
यह मामला फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है, और अगली सुनवाई 28 अक्टूबर, 2026 को निर्धारित है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया चल रही है, यह संभव है कि दोनों पक्ष गतिरोध को सुलझाने के लिए अदालत के बाहर कोई समझौता कर लें। निवेशकों को इस मामले के भविष्य के अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि शेयरधारक समझौते या कैपिटल स्ट्रक्चर में कोई भी बदलाव बैंक के सार्वजनिक लिस्टिंग की ओर भविष्य के रास्ते को प्रभावित कर सकता है।
