Union Bank Share: Q1 में 6.6% बढ़ा मुनाफा, लोन बुक में 12.5% की तेजी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Union Bank Share: Q1 में 6.6% बढ़ा मुनाफा, लोन बुक में 12.5% की तेजी

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने जून तिमाही में अपने नेट प्रॉफिट (Net Profit) में पिछले साल के मुकाबले **6.6%** की बढ़ोतरी दर्ज की है। बैंक का नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹5,316 करोड़** हो गया है। हालांकि, लोन में डबल-डिजिट ग्रोथ के बावजूद, निवेशकों की नजर नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) में आई मामूली गिरावट और बुरे कर्जों के लिए बढ़ाए गए प्रोविजन्स (Provisions) पर है। बैंक की कुल एडवांसेज (Gross Advances) **₹10.96 लाख करोड़** तक पहुंच गई, जिसमें रिटेल, एग्रीकल्चर और छोटे बिजनेस सेक्टर की अच्छी डिमांड देखी गई।

नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी कर दिए हैं। बैंक ने कुल ₹5,316 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 6.6% ज्यादा है। बैंक के कुल एडवांसेज (Gross Advances), यानी दिए गए कुल लोन, 12.50% बढ़कर ₹10.96 लाख करोड़ हो गए। इस ग्रोथ में रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME (RAM) सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा, जिसमें 11.56% की बढ़ोतरी के साथ ₹6.08 लाख करोड़ का आंकड़ा छुआ गया।

मुनाफे और मार्जिन पर दबाव?

जहां एक ओर बैंक का प्रॉफिट बढ़ा है, वहीं नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में मामूली 1.1% की गिरावट आई है, जो घटकर ₹9,406 करोड़ रह गई है। NII वह मुख्य मुनाफा होता है जो बैंक अपने लोन पर मिलने वाले ब्याज से कमाता है, जमाकर्ताओं को ब्याज देने के बाद। यह गिरावट निवेशकों के लिए संकेत है कि शायद जमा पर बढ़ती लागत या मार्केट में गलाकाट प्रतियोगिता के चलते बैंक के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में, जमा की ग्रोथ को लोन यील्ड के साथ संतुलित करना बैंक के लिए आने वाली तिमाहियों में एक बड़ी चुनौती होगी।

एसेट क्वालिटी और प्रोविजन्स का गणित

बैंक के निवेशकों के लिए सबसे अहम मेट्रिक्स में से एक है एसेट क्वालिटी, यानी कितने लोन खराब हो रहे हैं। यूनियन बैंक की ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) यानी डूबे कर्जों का प्रतिशत, पिछले क्वार्टर के 3.06% से घटकर 2.82% पर आ गया है। यह एक अच्छी खबर है।

हालांकि, कहानी का दूसरा पहलू भी है। बैंक के प्रोविजन्स (Provisions) यानी संभावित नुकसान से निपटने के लिए अलग रखे गए फंड में भारी बढ़ोतरी हुई है। यह दिसंबर तिमाही के ₹322 करोड़ से बढ़कर ₹1,055 करोड़ हो गया है। प्रोविजन्स का अचानक इतना बढ़ जाना यह दर्शाता है कि बैंक भविष्य में होने वाले डिफॉल्ट्स को लेकर सतर्क है या कुछ लोन में तनाव के संकेत दिख रहे हैं। इस तिमाही में नए स्लिपेज (Slippages), यानी नए डूबे कर्जों की रकम ₹2,023 करोड़ रही। निवेशक इस पर बारीकी से नजर रखेंगे कि यह ट्रेंड आगे स्थिर होता है या नहीं।

बिजनेस ग्रोथ की दिशा

लोन के अलावा, बैंक की डिपॉजिट जुटाने की रफ्तार मिली-जुली रही है। कुल ग्लोबल बिजनेस 7.46% बढ़कर ₹23.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया। ग्लोबल डिपॉजिट्स में 3.50% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹12.83 लाख करोड़ हो गए। वहीं, डोमेस्टिक CASA (करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट) डिपॉजिट्स में 11.72% की मजबूत ग्रोथ देखने को मिली। CASA रेशियो बढ़कर 35.10% हो गया है, जिसे आमतौर पर अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे बैंक को कम लागत वाला फंड मिलता है, जो ब्याज खर्चों को मैनेज करने में मदद करता है।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशक मुख्य रूप से तीन बातों पर ध्यान देंगे। पहला, क्या बैंक आने वाली तिमाहियों में प्रतिस्पर्धी माहौल के बावजूद अपनी नेट इंटरेस्ट इनकम को स्थिर या बेहतर कर पाएगा। दूसरा, नए लोन स्लिपेज के ट्रेंड से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एसेट क्वालिटी में सुधार जारी रहता है या नहीं। और तीसरा, क्या बैंक अपनी डिपॉजिट ग्रोथ को लोन की ग्रोथ के अनुरूप बढ़ा पाएगा, जो उसके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को तय करेगा।

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