Union Bank of India ने जून 2026 तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक के मुनाफे में **30%** की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो **₹5,332 करोड़** रहा। यह उछाल ऊंची ब्याज आय और बेहतर एसेट क्वालिटी का नतीजा है।
Union Bank का शानदार प्रदर्शन: कमाई ने तोड़े सारे रिकॉर्ड!
Union Bank of India ने नए फाइनेंशियल ईयर की दमदार शुरुआत की है। बैंक ने 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में ₹5,332 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह मुनाफा ₹4,116 करोड़ था, यानी 29.54% की शानदार बढ़ोतरी। इस जबरदस्त परफॉर्मेंस के पीछे 10% बढ़ी नेट इंटरेस्ट इनकम, जो ₹10,037 करोड़ रही, साथ ही ऑपरेटिंग खर्चों का बेहतर प्रबंधन और बैड लोन के लिए कम प्रोविज़न का बड़ा हाथ है।
ऑपरेशनल माइलस्टोन और एसेट क्वालिटी में सुधार
इस तिमाही की सबसे बड़ी खबर यह है कि बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट पहली बार ₹8,000 करोड़ के पार निकल गया, जो ₹8,003 करोड़ रहा। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी लगातार सुधार देखने को मिला है। जून 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो घटकर 2.65% पर आ गया, जो पिछले साल 3.52% था। वहीं, नेट एनपीए (Net NPA) रेशियो भी पिछले साल के 0.62% से घटकर 0.47% हो गया। ये आंकड़े बताते हैं कि बैंक अपने लोन पोर्टफोलियो को बखूबी मैनेज कर रहा है।
लोन और डिपॉजिट ट्रेंड्स
बैंक के ग्लोबल एडवांसेस में 12.50% की ईयर-ऑन-ईयर बढ़ोतरी हुई है, जो ₹10,96,331 करोड़ तक पहुंच गई। डोमेस्टिक यानी घरेलू लोन ग्रोथ इस बढ़ोतरी का मुख्य जरिया रहा, जो 13.11% बढ़ी। इसमें MSME और बड़े कॉर्पोरेट सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा, जिनमें क्रमशः 16.49% और 15.32% की ग्रोथ देखी गई। हालांकि, डोमेस्टिक डिपॉजिट्स की ग्रोथ थोड़ी धीमी, 3.49% रही, लेकिन बैंक ने अपने फंडिंग मिक्स को बेहतर बनाया है। लो-कॉस्ट CASA डिपॉजिट्स कुल डिपॉजिट्स का 35.10% हो गया है, जो पिछले साल 32.52% था।
भविष्य की फंडिंग और कैपिटल स्ट्रेटेजी
आगे चलकर, बैंक अपनी क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए रिसोर्स मोबिलाइजेशन पर फोकस कर रहा है। बैंक $1.5 बिलियन से $2.0 बिलियन तक का फंड फ्रेश FCNR (B) डिपॉजिट्स के जरिए जुटाने की योजना बना रहा है। इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की कंसेशनल स्वैप विंडो का फायदा उठाया जाएगा, जो सितंबर 2026 तक खुली है। जून से अब तक बैंक इस जरिए से $105 मिलियन जुटा चुका है। इसके अलावा, मैनेजमेंट $300 मिलियन तक का विदेशी मुद्रा लोन जुटाने पर भी विचार कर रहा है और एम्प्लॉई स्टॉक परचेज स्कीम (ESPS) की संभावनाओं को भी खंगाल रहा है।
निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि बैंक डिपॉजिट मोबिलाइजेशन और क्रेडिट ग्रोथ के बीच बैलेंस बनाते हुए अपना नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बनाए रख पाता है या नहीं, जो इस तिमाही में 2.80% रहा। भविष्य में विदेशी लोन की योजनाएं और किसी भी संभावित एम्प्लॉई शेयर स्कीम का टाइमिंग, बैंक की कैपिटल मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी के अहम इंडिकेटर होंगे।
