MFI सेक्टर का जलवा, Ujjivan SFB के शेयर चमके
Ujjivan Small Finance Bank के शेयरों में पिछले एक साल में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। इसकी सबसे बड़ी वजह माइक्रोफाइनेंस (MFI) सेक्टर का शानदार रिकवर करना है। इस तेजी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और खासकर ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में छोटे कर्जों की मांग बढ़ने की उम्मीद जगी है।
Nifty Bank को चटनी चटाया, शानदार रिटर्न
Ujjivan SFB के शेयरों ने पिछले एक साल में 51.69% का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि इसी दौरान Nifty Bank इंडेक्स महज़ 7% ही बढ़ पाया। यह मजबूत परफॉरमेंस भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के प्रति बढ़ते पॉजिटिव सेंटिमेंट को दिखाती है, जो बेहतर आर्थिक हालात और छोटे कर्जों की मांग से और मजबूत हुआ है। MFI सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ के चलते USFB इस सेक्टर-व्यापी रिवाइवल का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। 15 अप्रैल 2026 तक, शेयर ₹58.50 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले क्लोजिंग से 2.99% नीचे था। दिन के कारोबार में यह ₹56.58 और ₹59.97 के बीच रहा। बैंक का मार्केट कैप लगभग ₹11,371.80 करोड़ है।
वैल्यूएशन और सेक्टर का हाल
Ujjivan Small Finance Bank का पिछले बारह महीनों का P/E रेश्यो लगभग 23.76x है। यह इसके दस साल के मीडियन 10.86x से ज्यादा है, लेकिन AU Small Finance Bank जैसे प्रतिस्पर्धियों (जिनका P/E 31.74x है) के मुकाबले कॉम्पिटिटिव है। दूसरी ओर, Equitas Small Finance Bank और ESAF Small Finance Bank जैसे बैंकों का P/E रेश्यो अभी निगेटिव है। माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, पर कुछ स्ट्रक्चरल दिक्कतें अभी भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, FY25 में लोन बुक में गिरावट और NPA में बढ़ोत्तरी देखी गई है, जो कंसोलिडेशन की ओर इशारा करती है। फिर भी, लंबे समय में माइक्रो-क्रेडिट की मांग मजबूत बनी हुई है, और अनुमान है कि 2031 तक यह मार्केट 13.78 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो 10.20% के CAGR से बढ़ेगा। वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) पर USFB का फोकस हमेशा से इसकी एक बड़ी ताकत रहा है।
RBI का बड़ा झटका, लाइसेंस एप्लीकेशन वापस
सबसे अहम खबर यह है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने Ujjivan Small Finance Bank की यूनिवर्सल बैंक बनने की एप्लीकेशन वापस भेज दी है। RBI ने इसके पीछे बैंक की लोन बुक के और ज्यादा डाइवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) की ज़रूरत बताई है। इसका मतलब है कि माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में बैंक की बड़ी हिस्सेदारी, जो अब तक एक फायदा रही है, उसे रेगुलेटर अब कंसंट्रेशन रिस्क (सांद्रता जोखिम) के तौर पर देख रहे हैं। यह फैसला USFB के अपने बिजनेस मिक्स और ग्राहक आधार को बढ़ाने के प्लान में एक बड़ा रोड़ा है। बैंक को अब दोबारा अप्लाई करने से पहले अपने पोर्टफोलियो में और अधिक डाइवर्सिफिकेशन दिखाना होगा। इसका मतलब है कि बैंक को फिलहाल MFI सेगमेंट पर ही निर्भर रहना पड़ेगा, जो रेगुलेटरी बदलावों और आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील है। बैंक ने Q3 FY26 में ₹186 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो पिछले साल की तुलना में 71% ज्यादा था, और लोन बुक भी बढ़ रही थी, लेकिन RBI का फीडबैक यही है कि बैंक अभी यूनिवर्सल बैंकिंग के सख्त मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा है। बैंक ने सुरक्षित लोन (secured lending) पर फोकस बढ़ाया है, और दिसंबर 2025 तक इसका शेयर 48% तक पहुंच गया था, पर RBI का मानना है कि अभी और प्रोग्रेस की जरूरत है।
एनालिस्ट्स का भरोसा कायम, टारगेट प्राइस ₹73.86
रेगुलेटरी अड़चन के बावजूद, Ujjivan Small Finance Bank को लेकर एनालिस्ट्स का भरोसा काफी हद तक बना हुआ है। 23 एनालिस्ट्स की 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की कंसेंसस रेटिंग बताती है कि मौजूदा स्तरों से शेयर में 22% से ज्यादा की बढ़ोतरी की उम्मीद है, और उनका औसत टारगेट प्राइस ₹73.86 है। अनुमान है कि कंपनी के EPS में सालाना 41.3% और रेवेन्यू में सालाना 24.2% की जोरदार ग्रोथ देखने को मिल सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के जोखिमों को संभालते हुए डाइवर्सिफिकेशन की रणनीति को कितनी सफलतापूर्वक लागू कर पाता है, जो उसके लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन और यूनिवर्सल बैंकिंग स्टेटस के लिए महत्वपूर्ण होगा।