Ujjivan Small Finance Bank ने अपने कुल लोन पोर्टफोलियो का **50%** से ज़्यादा हिस्सा सिक्योरड लोन में बदल दिया है। यह बैंक के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक (strategic) बदलाव है, जो पहले ज़्यादातर अनसिक्योर्ड (unsecured) माइक्रोफाइनेंस पर निर्भर था। RBI की सलाह के बाद बैंक यह कदम उठा रहा है। बैंक ने Q1 में **₹317 करोड़** का शानदार मुनाफा भी दर्ज किया है।
Detailed Coverage
लोन पोर्टफोलियो में आया बड़ा मोड़
Ujjivan Small Finance Bank ने अपने इतिहास में पहली बार लोन बुक के आधे से ज़्यादा हिस्से को सिक्योरड एसेट्स (secured assets) में बदल लिया है। जून 2026 के अंत तक, बैंक के सिक्योरड लोन में पिछले साल की तुलना में 43% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹21,638 करोड़ तक पहुँच गया। यह कदम बैंक की पुरानी अनसिक्योर्ड माइक्रो-बैंकिंग पर निर्भरता को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
एसेट क्वालिटी पर फोकस
लोन मिक्स (loan mix) में यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि RBI ने बैंक को अपने लोन पोर्टफोलियो को माइक्रोफाइनेंस से हटाने की सलाह दी थी। जब बैंक ने यूनिवर्सल बैंक बनने की अर्ज़ी वापस ली थी, तब RBI ने पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई (diversify) करने को कहा था। सिक्योरड लोन, जैसे कि होम लोन और व्हीकल लोन, अब बैंक की कुल ₹42,903 करोड़ की लोन बुक का 50.4% हिस्सा बन गए हैं। इससे बैंक अपने ऑपरेशंस को रेगुलेटरी (regulatory) उम्मीदों के करीब ला रहा है।
शानदार फाइनेंशियल नतीजे
इस तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट (net profit) बढ़कर ₹317 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹103 करोड़ था। ऑपरेटिंग प्रॉफिट (operating profit) में 52% का उछाल आया और यह ₹548 करोड़ रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम (net interest income) 38% बढ़कर ₹1,186 करोड़ हो गई। मुनाफे में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह बैड लोंस (bad loans) के लिए रखे गए प्रोविज़ंस (provisions) में 43% की कमी है।
मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार
ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) में भी सुधार दिखा है। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (net interest margin) 8.5% रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 80 बेसिस पॉइंट (basis points) ज़्यादा है। एसेट क्वालिटी (asset quality) में भी सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (gross non-performing assets) यानी बैड लोंस का अनुपात घटकर 2.2% पर आ गया है, जो पिछले साल से 36 बेसिस पॉइंट कम है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक लोन डाइवर्सिफिकेशन (loan diversification) की इस गति को कैसे बनाए रखता है और साथ ही सिक्योरड लेंडिंग (secured lending) के रिस्क को कैसे मैनेज करता है। हालांकि, बैंक का माइक्रो-बैंकिंग सेगमेंट, जो 16.8% बढ़कर ₹21,371 करोड़ हो गया है, अभी भी बिज़नेस का एक बड़ा हिस्सा है। भविष्य में यह देखना होगा कि क्या सिक्योरड लोन की यह ग्रोथ जारी रहती है और इसका बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी पर क्या असर पड़ता है।
