Ugro Capital ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **14%** गिरकर **₹37 करोड़** रहा है। हालांकि, लोन वितरण में **77%** की धमाकेदार उछाल दर्ज की गई है। अब निवेशकों की नजर **20 नवंबर** को होने वाली Profectus Capital मर्जर की NCLT सुनवाई पर टिकी है।
मुनाफे पर क्यों दिखा दबाव?
कंपनी के नतीजों में बढ़ते खर्चों का असर साफ नजर आया है। सितंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹37 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹43.3 करोड़ था। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह 91% का भारी इजाफा है, जो कंपनी ने इंपेयरमेंट चार्जेस (Impairment Charges) के तौर पर ₹84.7 करोड़ सेट-असाइड किए हैं। इसके अलावा, कंपनी की फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) भी बढ़कर ₹264.8 करोड़ तक पहुंच गई है।
लोन वितरण में तूफानी तेजी
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, कंपनी का बिजनेस मोमेंटम काफी मजबूत है। MSME सेक्टर में कंपनी का लोन वितरण पिछले साल के मुकाबले 77% बढ़कर ₹3,159 करोड़ हो गया है। यह डेटा बताता है कि बाजार में कंपनी के क्रेडिट प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड है, लेकिन चुनौती अब इस ग्रोथ को मुनाफे में बदलने और एसेट क्वालिटी बनाए रखने की है।
मर्जर का क्या है प्लान?
कंपनी के लिए Profectus Capital के साथ प्रस्तावित मर्जर सबसे बड़ा गेम चेंजर हो सकता है। 20 नवंबर, 2026 को National Company Law Tribunal (NCLT) में अंतिम सुनवाई तय की गई है। मैनेजमेंट का मानना है कि इस मर्जर के बाद कंपनी की अकाउंटिंग प्रैक्टिस में सुधार होगा, जिससे तिमाही मुनाफे में होने वाली अनिश्चितता कम हो जाएगी। मर्जर पूरा होने के बाद कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) 22% के करीब रहने का अनुमान है, जो कंपनी की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।
