दिग्गज बैंकर Uday Kotak ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आगाह किया है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत पर **$170 बिलियन** की भारी-भरकम FCNR(B) डिपॉजिट रीपेमेंट लायबिलिटी आने वाली है, जो ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में एक बड़ी चुनौती खड़ी कर सकती है।
रीपेमेंट का बड़ा बोझ
Kotak Mahindra Bank के संस्थापक Uday Kotak ने भारत के सामने खड़ी नई वित्तीय चुनौती की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि Foreign Currency Non-Resident Bank (FCNR(B)) डिपॉजिट्स, जो कभी फॉरेक्स रिजर्व को सहारा देने के लिए इस्तेमाल किए गए थे, अब एक बड़े वित्तीय बोझ में बदल रहे हैं। अनुमान है कि अगले 3 से 5 सालों में यह रीपेमेंट लायबिलिटी $160 बिलियन से $170 बिलियन के बीच पहुंच सकती है।
क्यों चिंता का विषय है यह?
FCNR(B) डिपॉजिट वे अकाउंट्स हैं जो NRI द्वारा विदेशी मुद्रा में रखे जाते हैं। Uday Kotak के अनुसार, RBI का 31 अगस्त को इस स्कीम को खत्म करने का फैसला सही समय पर लिया गया कदम था, क्योंकि इससे भारत कम लागत पर विदेशी फंड लॉक करने में कामयाब रहा। अगर यह स्कीम जारी रहती, तो अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण भारत के लिए उधार लेना और महंगा हो जाता।
ग्लोबल मार्केट से कॉम्पिटिशन
फिलहाल भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बनाए रखने की है। Kotak ने बताया कि करेंसी-हेज्ड बेसिस पर, US 10-year Treasury yields लगभग 5% पर हैं, और हेजिंग कॉस्ट करीब 3.5% है। यानी कुल प्रभावी रिटर्न 8.5% बैठता है, जो कि भारतीय सरकारी बॉन्ड के 7.4% के रिटर्न के मुकाबले काफी आकर्षक है। यह अंतर ग्लोबल निवेशकों को भारत के बजाय डॉलर एसेट्स की ओर आकर्षित कर रहा है।
आगे का रास्ता क्या है?
Kotak का मानना है कि अब भारत को विदेशी पूंजी के भरोसे रहने के बजाय घरेलू विकास (Domestic Growth) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें टेक्नोलॉजी, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी धाक जमानी होगी। निवेशकों के लिए अब भारतीय फॉरेक्स रिजर्व, रुपये की स्थिरता और RBI की ब्याज दरों पर लिए गए फैसले ही बाजार की दिशा तय करेंगे।
