US सरकार के बॉन्ड यील्ड्स 2002 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। **10-year Treasury Yield** के **5.31%** के आसपास होने से मार्केट के बड़े रणनीतिकार अपनी राय बदल रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ सकता है।
ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Anatole Kaletsky और Jim Bianco जैसे दिग्गज मार्केट रणनीतिकारों ने अब US गवर्नमेंट डेट पर अपने नजरिए में बदलाव के संकेत दिए हैं। हाई इंटरेस्ट रेट्स के दौर में जहां बॉन्ड की वैल्यू घटी थी, अब एक्सपर्ट्स इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर मान रहे हैं।
यील्ड का गणित
फिलहाल 10-year US Treasury notes की यील्ड 5.31% और 30-year बॉन्ड्स की यील्ड करीब 5.66% के स्तर पर है। साल 2002 के बाद यह पहला मौका है जब निवेशकों को इतना रिटर्न मिल रहा है। यही कारण है कि हालिया वोलेटिलिटी के बावजूद कई संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
US ट्रेजरी यील्ड्स का बढ़ना भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा संकेत है। जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स बढ़ती हैं, तो अमेरिकी सरकार के बॉन्ड दुनिया के सबसे सुरक्षित और आकर्षक एसेट बन जाते हैं। इसका सीधा नुकसान भारत जैसे देशों को होता है, क्योंकि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) अपना पैसा भारतीय बाजार से निकालकर अमेरिका की सुरक्षित यील्ड्स की ओर ले जा सकते हैं। हालांकि, अगर यील्ड्स अपने पीक पर हैं और भविष्य में गिरती हैं, तो यह इमर्जिंग मार्केट्स के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
रास्ता अभी भी कांटों भरा है। अमेरिका का बजट घाटा लगातार बढ़ रहा है और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता के कारण एनर्जी प्राइसेस में तेजी बनी हुई है, जिससे महंगाई का डर कम नहीं हो रहा। इन हालातों में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में US इंफ्लेशन डेटा और फेड के बयानों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि यही बॉन्ड यील्ड की अगली दिशा तय करेंगे।
