US सरकार ने भारतीय पेटेंटेड स्पेशलिटी दवाओं और इंग्रीडिएंट्स को **100%** प्रस्तावित टैरिफ से छूट दे दी है। इस फैसले से इंडियन CDMO कंपनियों को बड़ी राहत मिली है और उनके एक्सपोर्ट पर मंडरा रहा खतरा टल गया है।
राहत का दायरा और असर
अमेरिकी प्रशासन ने यह छूट भारत समेत 19 देशों को दी है। इस फैसले से उन हाई-वैल्यू दवाओं को सुरक्षा मिली है, जिन पर सितंबर 2026 तक 100% टैरिफ लागू होने वाला था। यह कदम उन इंडियन CDMO कंपनियों के लिए संजीवनी की तरह है, जिन्होंने ग्लोबल सप्लाई चेन में भारी निवेश किया है।
किन कंपनियों को होगा फायदा?
यह छूट फर्टिलिटी मेडिसिन्स, सेल और जीन ट्रीटमेंट जैसी जटिल दवाओं पर लागू होगी। Divi’s Laboratories, Syngene International और Laurus Labs जैसे बड़े नामों के लिए यह फैसला बाजार में उनकी लागत प्रतिस्पर्धा (Cost-competitiveness) बनाए रखेगा। इसके अलावा Sun Pharmaceutical Industries और Lupin के CDMO वर्टिकल को भी इस पॉलिसी से स्थिरता मिलेगी।
रिस्क और मार्केट का नज़रिया
यह पॉलिसी बदलाव 'Proclamation 11020' के तहत आया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना था। हालांकि, दवाइयों की किल्लत और सप्लाई चेन में रुकावट के डर से अमेरिका को यह कदम पीछे खींचना पड़ा। निवेशकों के लिए यह एक बड़े 'रेगुलेटरी ओवरहेंग' के खत्म होने जैसा है, क्योंकि 100% टैरिफ सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर चोट कर सकता था।
हालांकि, अभी केवल पेटेंटेड और दुर्लभ बीमारियों वाली दवाओं को ही छूट दी गई है, इसलिए जानकारों का मानना है कि भविष्य में ट्रेड पॉलिसी और दवाओं की कैटेगरी में होने वाले बदलावों पर नजर रखना जरूरी है।
