UPI के 10 साल पूरे: अब मर्चेंट फीस की तैयारी, बदल सकता है डिजिटल पेमेंट का पूरा गणित

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AuthorAditya Rao|Published at:
UPI के 10 साल पूरे: अब मर्चेंट फीस की तैयारी, बदल सकता है डिजिटल पेमेंट का पूरा गणित

भारत का UPI अब **10** साल का हो चुका है और रिटेल डिजिटल पेमेंट का **86%** हिस्सा इसी के जरिए होता है। सफलता के इस दशक के बाद अब सरकार ने कानून में बदलाव कर मर्चेंट फीस का रास्ता साफ कर दिया है, जो बैंकों और फिनटेक कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है।

UPI का सफर और रिकॉर्ड डेटा

25 अगस्त 2026 को UPI ने अपने सफल सफर के 10 साल पूरे कर लिए हैं। साल 2016 में एक छोटे एक्सपेरिमेंट के तौर पर शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म आज देश की रीढ़ बन चुका है। अगर हम आंकड़ों की बात करें, तो 2017 के फाइनेंशियल ईयर में जहाँ महज 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, वहीं 2026 के फाइनेंशियल ईयर में यह आंकड़ा 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन के पार पहुँच गया है।

मर्चेंट फीस: क्या है सरकारी प्लान?

अब तक पूरा इकोसिस्टम 'जीरो-MDR' (Merchant Discount Rate) पॉलिसी पर चल रहा था, यानी मर्चेंट को पेमेंट लेने के लिए कोई चार्ज नहीं देना पड़ता था। लेकिन, इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी के बढ़ते खर्च को देखते हुए सरकार ने 'Payment and Settlement Systems Act, 2007' में बड़ा संशोधन किया है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर 0.25% से 0.50% तक की फीस लागू की जा सकती है। इससे पेमेंट इकोसिस्टम में ₹15,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है, जिसका इस्तेमाल सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में किया जाएगा।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि छोटे मर्चेंट्स की तरफ से फीस को लेकर विरोध हो सकता है, जिससे शुरुआती दौर में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में थोड़ी गिरावट दिख सकती है। इसके अलावा, 'Credit Line on UPI' के जरिए जो अनसिक्योर्ड लेंडिंग बढ़ रही है, बैंक उस पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार फीस लागू करने के लिए क्या गाइडलाइन्स लेकर आती है और इसका मार्केट पर क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.