UPI ट्रांजैक्शन की सामान्य लिमिट ₹1 लाख तय है, लेकिन IPO, टैक्स और हेल्थकेयर जैसे खास पेमेंट के लिए आप ₹5 लाख तक का ट्रांसफर कर सकते हैं। हालांकि, बैंक की अपनी शर्तें भी ट्रांजैक्शन फेल होने की वजह बन सकती हैं।
भारत में UPI ट्रांजैक्शन का दायरा पिछले 10 साल में काफी बढ़ा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पूरी तरह से एक टायर स्ट्रक्चर (Tiered Structure) पर काम करता है? सामान्य खुदरा भुगतान के लिए ट्रांजैक्शन कैप ₹1 लाख तय है, लेकिन कुछ खास आर्थिक गतिविधियों के लिए इसे बढ़ाकर ₹5 लाख किया गया है।
किन कामों के लिए ₹5 लाख की छूट?
NPCI ने उन क्षेत्रों में लिमिट बढ़ाई है जहाँ पैसों का लेन-देन ज्यादा होता है। इसमें कैपिटल मार्केट्स, इंश्योरेंस प्रीमियम, एजुकेशन फीस, हेल्थकेयर खर्च, IPO एप्लीकेशन और सरकारी टैक्स शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिलता है, जो अब IPO बिडिंग के लिए NEFT या RTGS के बजाय UPI का इस्तेमाल करके तेजी से भुगतान कर सकते हैं।
बैंक की अपनी शर्तें भी जरूरी
याद रखें, NPCI की ₹5 लाख की अनुमति का मतलब यह नहीं है कि आपका बैंक भी आपको पूरी छूट देगा। बैंक सुरक्षा कारणों से अपनी आंतरिक लिमिट को NPCI के निर्धारित अधिकतम स्तर से कम रख सकते हैं। यदि आपका ट्रांजैक्शन बार-बार फेल हो रहा है, तो तुरंत अपने बैंक के मोबाइल ऐप या UPI प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी सेटिंग्स चेक करें।
अन्य पेमेंट मोड्स और लिमिट्स
UPI के अन्य फीचर्स की अपनी सीमाएं हैं:
- UPI Lite: छोटे और क्विक पेमेंट के लिए ₹4,000 प्रति ट्रांजैक्शन की लिमिट है, और वॉलेट बैलेंस ₹50,000 से ज्यादा नहीं हो सकता।
- UPI 123Pay: बिना इंटरनेट के फीचर फोन यूजर्स के लिए अलग वॉल्यूम लिमिट्स लागू हैं।
ट्रांजैक्शन फेल होने से कैसे बचें?
UPI सिस्टम में 'रोलिंग विंडो' का कॉन्सेप्ट चलता है, यानी 24 घंटे की गिनती ट्रांजैक्शन के समय से शुरू होती है, न कि आधी रात से। इसके अलावा, अगर आप नए यूजर हैं, तो शुरुआत के 24 घंटे के लिए ₹5,000 की अस्थायी लिमिट होती है। भारी ट्रांजैक्शन (जैसे टैक्स या IPO पेमेंट) को आखिरी समय के भरोसे न छोड़ें, क्योंकि सर्वर लोड के कारण पेमेंट फेल होने का जोखिम हमेशा बना रहता है।
