UPI मार्केट शेयर को **30%** तक सीमित करने का NPCI का लक्ष्य मुश्किल में नजर आ रहा है। PhonePe और Google Pay का कुल **80%** मार्केट पर कब्जा है। इस बीच, **15 अक्टूबर** से **₹2,000** से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर नए MDR शुल्क की तैयारी है, जो गेम चेंजर साबित हो सकता है।
नियम लागू करने में क्यों आ रही है दिक्कत?
NPCI का डिजिटल पेमेंट को डिसेंट्रलाइज करने का प्लान साल 2020 से ही चर्चा में है, लेकिन 31 दिसंबर, 2026 की डेडलाइन नजदीक आने के बावजूद, इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। PhonePe और Google Pay का संयुक्त मार्केट शेयर लगभग 80% है। रेगुलेटर्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर इन दिग्गजों पर अचानक सख्त नियम लागू किए गए, तो करोड़ों यूजर्स को पेमेंट में परेशानी हो सकती है और सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ियां आ सकती हैं।
नेटवर्क इफेक्ट्स और यूजर्स की आदत
बाजार में छोटे प्लेयर्स जैसे Paytm और Amazon Pay के लिए असली चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि 'नेटवर्क इफेक्ट्स' है। मर्चेंट्स के पास पहले से लगे ब्रांडेड साउंडबॉक्स और यूजर्स की पुरानी आदतें ऐसी हैं, जिन्हें बदलना मुश्किल हो रहा है। ग्राहक उसी प्लेटफॉर्म पर टिके रहना पसंद कर रहे हैं जिसे वे आसानी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
MDR से बदलेगी कमाई की तस्वीर
इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव अब रेगुलेटरी कैप के बजाय रेवेन्यू मॉडल से आने की उम्मीद है। 15 अक्टूबर, 2026 से ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की योजना है। इस कदम से छोटे पेमेंट्स ऐप्स को सीधे कमाई का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें अपनी मार्केटिंग और यूजर एक्विजिशन को आक्रामक बनाने के लिए जरूरी फंड मिल पाएगा। यह मॉडल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम की जंग को मुनाफे की रेस में बदलने में मदद कर सकता है।
