UPI लेनदेन पर MDR (Merchant Discount Rate) के नए प्रस्ताव से फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में लागत बढ़ने का डर सता रहा है। इससे ब्रोकर, वेल्थ प्लेटफॉर्म और म्यूचुअल फंड वितरकों के मार्जिन पर भारी असर पड़ सकता है, जो उनकी कमाई का एक तिहाई तक कम कर सकता है।
जानिए क्या है नया प्रस्ताव?
सरकार की ओर से कुछ खास तरह के UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का प्रस्ताव आया है। यह प्रस्ताव खासकर उन बड़े व्यापारियों के लिए है जो 0.5% से कम दर पर ₹2,000 से बड़े ट्रांजेक्शन करते हैं। इस कदम से ब्रोकर, वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म और म्यूचुअल फंड वितरकों की लागत में बढ़ोतरी की आशंका है।
वितरकों के मार्जिन पर सीधा असर
फिलहाल, कई म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म लगभग 0.75% के मार्जिन पर काम करते हैं। प्रस्तावित 0.25-0.30% MDR इन प्लेटफॉर्म्स के मार्जिन को एक तिहाई तक कम कर सकता है। ऐसे में, यह दबाव कंपनियों को अतिरिक्त शुल्क अपने ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर कर सकता है, जिससे निवेशकों के लिए निवेश महंगा हो सकता है।
डायरेक्ट प्लान और बड़े ट्रांजेक्शन पर ज्यादा असर
डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान पर फोकस करने वाले प्लेटफॉर्म्स के लिए यह प्रस्ताव ज्यादा मुश्किल खड़ा कर सकता है। इन प्लेटफॉर्म्स पर वितरकों को फंड हाउस से कोई कमीशन नहीं मिलता, ऐसे में UPI ट्रांजेक्शन का कोई भी खर्च सीधे तौर पर प्लेटफॉर्म के ऑपरेशनल खर्च में जुड़ जाएगा। इसके अलावा, जो प्लेटफॉर्म ₹10,000 या ₹50,000 जैसे बड़े SIP या लम्पसम निवेश की सुविधा देते हैं, उनके लिए MDR की लागत काफी बढ़ सकती है।
ब्रोकरेज फर्मों की चिंता और प्लेटफॉर्म्स का वॉल्यूम
ब्रोकर्स, खासकर जिनके क्लाइंट बड़े निवेश के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, वे भी दबाव महसूस कर रहे हैं। हजारों ट्रांजेक्शन पर लगने वाला MDR, पहले से ही कम चल रहे ऑपरेशनल मार्जिन को और सिकोड़ सकता है। Groww और Angel One जैसे हाई-वॉल्यूम वाले डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म, जो बड़ी मात्रा में SIP और ग्राहक संपत्ति संभालते हैं, उनके प्रोसेसिंग खर्चों में भारी इजाफा हो सकता है। Groww ने FY26 में ₹46,624 करोड़ का म्यूचुअल फंड SIP इनफ्लो दर्ज किया, जबकि Angel One के 38 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं। Zerodha का Coin प्लेटफॉर्म भी डायरेक्ट म्यूचुअल फंड निवेश की सुविधा देता है।
'वेट एंड वॉच' की रणनीति
फाइनेंशियल सर्विस फर्म्स अभी इस प्रस्ताव के संभावित नतीजों का आकलन कर रही हैं और कई 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रही हैं। इस फ्रेमवर्क की बारीकियां, जैसे कि फाइनल रेट, ट्रांजेक्शन की सीमा और किन बिजनस कैटेगरी को कवर किया जाएगा, अभी तय होना बाकी है। सरकार का कहना है कि इस प्रस्ताव का मकसद आम उपभोक्ताओं पर UPI चार्ज थोपना नहीं है, बल्कि यह सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लागू होगा।
