भारत का UPI अब **11** देशों में काम कर रहा है, जिससे यात्रियों के लिए डिजिटल पेमेंट आसान हो गया है। हालांकि, हर जगह सुविधा अलग है और आपको **1%** से **3.5%** तक का फॉरेक्स मार्कअप देना पड़ सकता है।
कैसे करें UPI का इस्तेमाल?
अगस्त 2026 तक UPI का दायरा 11 देशों तक पहुंच गया है। लेकिन एक जरूरी बात यह है कि हर जगह इसकी सुविधा एक जैसी नहीं है। कई देशों में यह केवल फंड ट्रांसफर (रेमिटेंस) के लिए है, न कि दुकानों पर क्यूआर (QR) कोड स्कैन करके शॉपिंग करने के लिए। विदेश जाने से पहले आपको अपनी बैंकिंग ऐप में 'UPI International' फीचर को मैन्युअली एक्टिवेट करना होगा, वरना वहां आपका पेमेंट फेल हो सकता है।
सावधानियां और छिपे हुए खर्च
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सिर्फ फोन के भरोसे विदेश न जाएं, क्योंकि सर्वर या नेटवर्क की समस्या हो सकती है। अपने पास कैश, फॉरेक्स कार्ड और क्रेडिट कार्ड का कॉम्बिनेशन जरूर रखें। इसके अलावा, घरेलू UPI की तरह इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री नहीं है। बैंक के नियमों के आधार पर आपको 1% से 3.5% तक का फॉरेक्स मार्कअप देना पड़ सकता है, जो अक्सर पेमेंट के दौरान कट जाता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जुलाई 2026 में UPI का ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2,366 करोड़ के पार पहुंच चुका है। हालांकि NPCI एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है, लेकिन इसका असर बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर पर बहुत गहरा है। सरकार अब मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) को लेकर बदलाव कर सकती है, जो भविष्य में पेमेंट कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकते हैं। निवेशकों को इन रेगुलेटरी अपडेट्स पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
