UPI पर बड़ा बदलाव: 15 अक्टूबर से मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लगेगा शुल्क, ₹27,000 करोड़ का रेवेन्यू पूल होने की उम्मीद

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
UPI पर बड़ा बदलाव: 15 अक्टूबर से मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लगेगा शुल्क, ₹27,000 करोड़ का रेवेन्यू पूल होने की उम्मीद

डिजिटल पेमेंट की दुनिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट्स को **0.4%** का शुल्क देना होगा, जिससे FY28 तक **₹27,000 करोड़** का रेवेन्यू पूल तैयार होने का अनुमान है।

भारत में डिजिटल पेमेंट का चेहरा बदलने वाला UPI अब एक नए बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ रहा है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत, यदि कोई मर्चेंट UPI के जरिए ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान प्राप्त करता है, तो उसे 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा। वहीं, ₹75,000 और उससे अधिक के बड़े ट्रांजेक्शन पर शुल्क को अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन पर सीमित (Cap) कर दिया गया है।

यह फैसला पिछले छह सालों से चले आ रहे 'जीरो-MDR' दौर का अंत है, जिसने देश में डिजिटल क्रांति लाने में अहम भूमिका निभाई थी।

कैसे काम करेगा नया स्ट्रक्चर?

भले ही दर 0.4% तय की गई है, लेकिन प्रभावी दर (Effective Rate) लगभग 19 बेसिस पॉइंट्स रहने का अनुमान है। राहत की बात यह है कि:

  • P2P (पर्सन-टू-पर्सन) पेमेंट पूरी तरह से फ्री रहेंगे।
  • ₹2,000 से कम के सभी मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जिससे छोटे दुकानदार और आम उपभोक्ता प्रभावित नहीं होंगे।

इकोसिस्टम के लिए क्यों है यह जरूरी?

अब तक बैंक और फिनटेक कंपनियां साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का भारी भरकम खर्च खुद उठा रही थीं। जानकारों का मानना है कि FY28 तक UPI के जरिए सालाना पेमेंट ₹144 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इस पर शुल्क लगाने से जो ₹27,000 करोड़ का रेवेन्यू पूल बनेगा, वह डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूती देने और इसे लॉन्ग-टर्म में सस्टेनेबल बनाने में मदद करेगा।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

इन्वेस्टर्स की नजर अब इस बात पर है कि यह कमाई का बंटवारा बैंकों और पेमेंट ऐप्स के बीच कैसे होगा। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या मर्चेंट्स इस शुल्क को स्वीकार करेंगे या वे वैकल्पिक पेमेंट तरीकों की ओर मुड़ेंगे। बाजार की नजर इस ट्रांजिशन पर बनी हुई है कि क्या नया शुल्क लागू होने के बाद भी डिजिटल पेमेंट की ग्रोथ रफ्तार बरकरार रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.