UPI नेटवर्क ने सितंबर में **80.2 करोड़** डेली ट्रांजैक्शन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। अब निवेशकों और व्यापारियों की नजर **15 अक्टूबर, 2026** से लागू होने वाले **0.4%** के नए मर्चेंट शुल्क (MDR) पर है, जो **₹2,000** से अधिक के लेनदेन पर लगेगा।
भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने सितंबर 2026 में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने कुल मंथली वॉल्यूम 2,407 करोड़ ट्रांजैक्शन तक पहुंच गया, जबकि ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18% ज्यादा है।
नए MDR नियम और मार्केट का असर
तेजी से बढ़ते इन आंकड़ों के बीच, मार्केट पार्टिसिपेंट्स की निगाहें 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर टिकी हैं। नियमों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4% का MDR लगेगा। हालांकि, कैपिटल मार्केट सेगमेंट (म्यूचुअल फंड, स्टॉक्स और ब्रोकर पेमेंट) के लिए यह शुल्क 0.02% रखा गया है, जिसकी कैप ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
आम आदमी पर क्या असर होगा?
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने स्पष्ट किया है कि मर्चेंट ट्रांजैक्शन का लगभग 96% हिस्सा और कुल वैल्यू का 75% हिस्सा ₹2,000 के दायरे से नीचे है। यानी अधिकांश छोटे लेनदेन पहले की तरह ही मुफ्त रहेंगे। व्यापारियों द्वारा प्रस्तावित 'नो UPI डे' का विरोध भी वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत के बाद वापस ले लिया गया है, जिससे पेमेंट इकोसिस्टम में स्थिरता बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि बड़े ट्रांजैक्शन करने वाले मर्चेंट्स इस शुल्क के प्रभाव को कैसे मैनेज करते हैं।
