UPI के जरिए क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट पर कोई MDR नहीं है, लेकिन अब प्लेटफॉर्म्स 'कन्वीनियंस फीस' के नाम पर नया चार्ज ले सकते हैं।
नियम क्या कहता है?
UPI के माध्यम से क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट करने वाले यूजर्स के लिए सरकार का रुख साफ है: इन ट्रांजैक्शन्स पर कोई भी सरकारी MDR (Merchant Discount Rate) नहीं लगाया गया है। यह फैसला डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है, ताकि ट्रांजैक्शन पूरी तरह जीरो-कॉस्ट बना रहे।
क्यों लग रही है फीस?
हालांकि सरकार ने MDR पर रोक लगा दी है, लेकिन पेमेंट प्लेटफॉर्म्स Bharat Bill Payment System (BBPS) के जरिए काम करते हैं। यहाँ प्लेटफॉर्म्स के पास 'कन्वीनियंस फीस' या 'प्रोसेसिंग चार्जेस' लेने की छूट है। यह शुल्क MDR से अलग होता है और यह पेमेंट प्लेटफॉर्म और सर्विस प्रोवाइडर के बीच हुए कमर्शियल एग्रीमेंट पर निर्भर करता है।
निवेशकों के लिए संकेत
डिजिटल पेमेंट कंपनियां फिलहाल भारी दबाव में हैं। चूंकि वे कंज्यूमर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं ले सकतीं, इसलिए मुनाफा कमाने के लिए उन्हें वैकल्पिक रास्तों की तलाश है। 'कन्वीनियंस फीस' इसी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है।
NPCI (National Payments Corporation of India) लगातार UPI इकोसिस्टम में क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रही है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कंपनियां ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के साथ-साथ अपने रेवेन्यू मॉडल को कैसे बैलेंस कर रही हैं। भविष्य में इन प्लेटफॉर्म्स का मार्जिन इस बात पर निर्भर करेगा कि वे यूजर एक्सपीरियंस खराब किए बिना कितनी चतुराई से ये नॉन-रेगुलेटेड चार्जेस वसूलते हैं।
