भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट में जुलाई 2026 में **₹11.7 लाख करोड़** का लेनदेन हुआ है। इसमें UPI की हिस्सेदारी **77.3%** रही है, जबकि कार्ड्स के इस्तेमाल में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, हाई-वैल्यू UPI ट्रांजेक्शन पर संभावित फीस की चर्चा ने मार्केट में हलचल बढ़ा दी है।
भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, UPI अब मर्चेंट ट्रांजेक्शन के लिए सबसे भरोसेमंद जरिया बन गया है। कुल डिजिटल पेमेंट मार्केट में 19.6% की सालाना बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह ₹11.7 लाख करोड़ के आंकड़े पर पहुंच गया है।
कार्ड्स की घटती चमक
जैसे-जैसे UPI का दायरा बढ़ रहा है, ट्रेडिशनल पेमेंट के तरीकों का इस्तेमाल कम होता जा रहा है। जुलाई में मर्चेंट पेमेंट में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी घटकर 17.7% रह गई, जो पिछले साल के मुकाबले 203 बेसिस पॉइंट्स कम है। वहीं, डेबिट कार्ड का आंकड़ा भी 3.9% से गिरकर 3.2% पर आ गया है। उपभोक्ता अब POS मशीनों के झंझट के बजाय UPI की झटपट सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रेगुलेटरी बदलाव और मोनेटाइजेशन का जोखिम
UPI के 'जीरो-कॉस्ट' मॉडल पर अब सवाल उठने लगे हैं। अगस्त 2026 में सरकार ने 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल' पास किया है, जो हाई-वैल्यू UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता साफ करता है। हालांकि अभी दरें तय नहीं हुई हैं, लेकिन यह पेमेंट कंपनियों और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है।
आगे की राह और क्रेडिट का खेल
आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच UPI की ग्रोथ दर 18.7% पर आ गई है, जो मार्केट में आ रही मैच्योरिटी का संकेत है। दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल दौर में भी नकदी (Cash) का चलन खत्म नहीं हुआ है और इस दौरान कैश सर्कुलेशन 13% बढ़ा है। अब इंडस्ट्री की नजरें 'UPI-ऑन-क्रेडिट' पर टिकी हैं, जिसे फिनटेक कंपनियां रेवेन्यू बढ़ाने का नया जरिया मान रही हैं।
