उत्तर प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (UPSLSA) ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम के **2 लाख** से ज्यादा पेंडिंग केस को निपटाने के लिए एक विशेष **40 घंटे** का मेडिएशन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है, ताकि इंश्योरेंस कंपनियों को अदालतों के बाहर विवाद सुलझाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
कोर्ट कचहरी से बाहर समाधान की राह
12 अक्टूबर, 2026 को गोमती नगर में UPSLSA ने 'Mediation for the Nation 3.0' कैंपेन के तहत इस प्रोग्राम की शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों को नेगोशिएशन और कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन की स्किल्स सिखाना है, ताकि केस को कोर्ट के बजाय आपसी सहमति से सुलझाया जा सके।
2 लाख पेंडिंग केसों का बोझ
फिलहाल उत्तर प्रदेश की ट्रिब्यूनल्स में 2 लाख से अधिक मोटर एक्सीडेंट केस पेंडिंग हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुए इस प्रोग्राम का मकसद पीड़ितों को जल्दी मुआवजा दिलाना और अदालतों पर दबाव कम करना है।
इंश्योरेंस सेक्टर पर असर
इंश्योरेंस कंपनियों के लिए लंबी कानूनी लड़ाइयां उनके लॉस रेशियो (Loss Ratio) पर बुरा असर डालती हैं। यदि ये विवाद मेडिएशन के जरिए जल्दी सुलझते हैं, तो कंपनियों के कानूनी खर्च में कमी आएगी और वे अपने फाइनेंशियल लायबिलिटीज को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगी। निवेशक इस बदलाव को काफी करीब से देख रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनरल इंश्योरेंस बिजनेस की प्रॉफिटेबिलिटी और कैपिटल एफिशिएंसी को प्रभावित कर सकता है।
रिस्क और भविष्य की राह
इस पहल की सफलता पूरी तरह से इंश्योरेंस कंपनियों की इच्छाशक्ति पर निर्भर है। यदि कंपनियां कोर्ट से बाहर सेटलमेंट के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो इस ट्रेनिंग का असर सीमित रह सकता है। इसके अलावा, IRDAI की ओर से चल रहे रेगुलेटरी डिस्कशन भी भविष्य में कंपनियों के बजट पर असर डाल सकते हैं। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि इस ट्रेनिंग के बाद कितने क्लेम सेटल होते हैं और क्या यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क बन पाएगा।
