UK के **30-year** सरकारी बॉन्ड यील्ड्स **6%** के स्तर को पार कर गए हैं, जो **1998** के बाद का उच्चतम आंकड़ा है। इस उछाल ने मॉर्गेज दरों को महंगा कर दिया है, जिससे वहां के लाखों घरों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
बॉन्ड मार्केट में हलचल का कारण
यूके (UK) के फाइनेंशियल सेक्टर में इस समय भारी उथल-पुथल मची है। 30-year सरकारी बॉन्ड यील्ड्स, जिन्हें गिल्ट्स (Gilts) भी कहा जाता है, 6% तक पहुंच गए हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर कर्ज लेने की लागत को प्रभावित कर रही है। बॉन्ड मार्केट की इस अनिश्चितता के कारण लेंडर्स ने अब 5% से कम ब्याज दर वाले मॉर्गेज प्रोडक्ट्स को हटाना शुरू कर दिया है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
Bank of England के डेटा के अनुसार, साल 2028 के अंत तक 50 लाख से ज्यादा परिवारों की मंथली ईएमआई (EMI) बढ़ सकती है। सबसे ज्यादा खतरा उन 7.5 लाख कर्जदारों पर है जिन्होंने महामारी के दौरान बहुत कम दरों पर लोन लिया था। अब जब ये लोग रिफाइनांसिंग की तरफ बढ़ेंगे, तो उन्हें बाजार की मौजूदा ऊंची दरों का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज चुकाने में खर्च बढ़ने से लोगों की डिस्पोजेबल इनकम घटेगी, जिससे इकोनॉमिक एक्टिविटी सुस्त हो सकती है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है?
वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड्स का बढ़ना एक बड़ी चिंता है। जब विकसित देशों में कर्ज लेना महंगा होता है, तो इसका असर ग्लोबल लिक्विडिटी और करेंसी ट्रेंड्स पर पड़ता है। यह स्थिति भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में FII सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती है और रुपया (Rupee) पर भी दबाव डाल सकती है।
अगली बड़ी अपडेट: बजट घोषणा
अब सबकी नजरें 28 अक्टूबर को होने वाली यूके सरकार की बजट घोषणा पर टिकी हैं। अगर सरकार की उधारी योजनाएं उम्मीद से ज्यादा बड़ी होती हैं, तो यील्ड्स और ऊपर जा सकते हैं। इस अनिश्चितता का असर हाउसिंग मार्केट पर भी दिख रहा है, जहां घर की कीमतों में बढ़त धीमी पड़ गई है और मॉर्गेज अप्रूवल की संख्या 2023 के अंत के बाद से सबसे निचले स्तर पर है।
