सैलरी का पूरा मामला
UGRO Capital ने शचिनेंद्र नाथ को वाइस-चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर 5 साल के लिए फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है, जो 2031 तक के लिए होगा। लेकिन इस रिन्यूअल का सबसे बड़ा पेंच ₹10 करोड़ का सालाना सैलरी पैकेज है। यह रकम फिक्स्ड बेस और शेयर की कीमत पर निर्भर वेरिएबल कंपोनेंट में बंटी होगी। कंपनी का कहना है कि यह स्ट्रक्चर इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के दायरे में नहीं आता।
हालांकि, प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म Stakeholder Empowerment Services (SES) ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स से इसके खिलाफ वोट करने की अपील की है।
रेगुलेटरी टेंशन और गवर्नेंस
इस पूरे विवाद की जड़ SEBI (Share Based Employee Benefits and Sweat Equity) रेगुलेशन के सख्त नियम हैं। मौजूदा नियमों के मुताबिक, प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप को ESOPs या ऐसी ही इक्विटी-लिंक्ड पेमेंट लेने की मनाही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन्हें शेयर की कीमतों में हेरफेर का जरिया माना जा सकता है।
हालांकि नाथ की खुद की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन प्रमोटर ग्रुप में आने की वजह से उन्हें इन नियमों का पालन करना होगा। प्रॉक्सी एडवाइजर्स का तर्क है कि शेयर के परफॉर्मेंस से जुड़ा कैश-सेटल्ड वेरिएबल पे, ESOPs जैसा ही है और यह SEBI के गवर्नेंस फ्रेमवर्क के असली मकसद को कमजोर कर सकता है।
शेयर क्यों लुढ़क रहे हैं?
UGRO Capital को लेकर निवेशकों की चिंता सिर्फ इस सैलरी प्रस्ताव तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में कंपनी के शेयर की कीमत में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है और यह अपने 52-हफ्ते के हाई लेवल से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। निवेशकों ने कंपनी के डेट-टू-इक्विटी प्रोफाइल और ऑपरेटिंग कैश फ्लो पर निर्भरता को लेकर भी चिंता जताई है।
यह पहली बार नहीं है जब कंपनी रेगुलेटरी जांच के दायरे में आई है। 2025 की शुरुआत में SEBI ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्ट्रक्चर में कंप्लायंस की कमी को लेकर कंपनी पर जुर्माना भी लगाया था। ऐसे में, यह प्रस्ताव निवेशकों को मैनेजमेंट की कमाई और कंपनी की असली फाइनेंशियल हेल्थ के बीच एक बड़ा गैप दिखा रहा है, खासकर तब जब NBFC एक मुश्किल क्रेडिट माहौल से गुजर रहा है।
मैनेजमेंट का क्या है कहना?
कंपनी के बोर्ड ने, जिसमें नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी भी शामिल है, इस प्रस्ताव को एक स्ट्रेटेजिक जरूरत बताया है। कंपनी का तर्क है कि नाथ का काम ब्रांड को स्थापित करना, शेयरहोल्डर बेस को बढ़ाना और वैल्यू ग्रोथ को आगे बढ़ाना है।
शेयर के परफॉर्मेंस से सैलरी का कुछ हिस्सा जोड़ने का मकसद यह दिखाना है कि एमडी के हित पब्लिक शेयरहोल्डर्स के साथ जुड़े हुए हैं। मैनेजमेंट का दावा है कि फाइनल स्ट्रक्चर में परफॉरमेंस मेट्रिक्स और कैप्स शामिल होंगे, जो RBI के नए गवर्नेंस गाइडलाइन्स के अनुरूप होंगे। उनका कहना है कि यह विवाद शायद उनके कॉम्पनसेशन मॉडल की गलतफहमी के कारण हो रहा है।
