फंड का पूरा हिसाब-किताब: India Ratings ने दी हरी झंडी
UGRO Capital Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने लेटेस्ट मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट्स (Monitoring Agency Reports) पेश कर दी हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि विभिन्न माध्यमों से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल तय योजनाओं के मुताबिक ही हो रहा है। India Ratings & Research Private Limited के स्वतंत्र मूल्यांकन के बाद यह कन्फर्मेशन मिली है।
फंड जुटाने की मुख्य गतिविधियां और उनका उपयोग:
प्रिफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) - जून 2024: इस इश्यू के जरिए ₹513.37 करोड़ जुटाए गए थे, जो मुख्य रूप से कम्पलसरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और कन्वर्टिबल वारंट्स के जरिए आए। इसका मकसद था लोन पोर्टफोलियो को 80% बढ़ाना, 15% कर्ज चुकाना और 5% जनरल कॉर्पोरेट पर्पज (GCP) के लिए रखना। रिपोर्ट के अनुसार, इस इश्यू से जुटाई गई पूरी ₹513.37 करोड़ की राशि अभी तक इस्तेमाल नहीं हुई है। हालांकि, India Ratings ने बताया है कि इस्तेमाल न हुई इस बड़ी रकम के बावजूद, तय किए गए उद्देश्यों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसका मतलब है कि फंड को इस्तेमाल करने की योजनाएं अभी चल रही हैं या अंतिम रूप दिया जा रहा है।
प्रिफरेंशियल इश्यू - सितंबर-अक्टूबर 2025: ₹534.64 करोड़ CCDs के जरिए जुटाए गए थे, जिसका मुख्य उद्देश्य Profectus Capital Private Limited का अधिग्रहण करना था। रिपोर्ट बताती है कि इस महत्वपूर्ण अधिग्रहण की आंशिक फंडिंग के लिए इस राशि का कुछ हिस्सा इस्तेमाल किया गया है।
राइट्स इश्यू (Rights Issue) - जून 2025: UGRO Capital ने राइट्स इश्यू के जरिए सफलतापूर्वक ₹380.72 करोड़ जुटाए। इसमें से ₹36,000.00 लाख (यानी ₹360 करोड़) बिजनेस एक्टिविटीज और आगे लोन देने के लिए कैपिटल बढ़ाने के वास्ते रखे गए थे। इसके अलावा, ₹867.11 लाख GCP के लिए और बाकी कुछ राशि इश्यू से जुड़े खर्चों के लिए आवंटित की गई थी। रिपोर्टिंग की तारीख तक, इस इश्यू से ₹20.72 करोड़ (यानी 2,071.83 लाख) की राशि अभी भी इस्तेमाल नहीं हुई थी, और कुछ खर्चे कंपनी द्वारा आंतरिक रूप से रिइम्बर्स किए जा रहे हैं।
रणनीतिक कदम: Profectus Capital का अधिग्रहण
Profectus Capital Private Limited के अधिग्रहण की आंशिक फंडिंग UGRO Capital के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम है। Profectus Capital, जो खुद एक NBFC है, संभावित रूप से UGRO के लिए कई फायदे ला सकती है, जैसे कि MSME लेंडिंग स्पेस में अपनी बाजार पहुंच, प्रोडक्ट्स और कस्टमर बेस का विस्तार करना। कॉम्पिटिटिव NBFC सेक्टर में इस तरह के अधिग्रहण ग्रोथ को तेज करने और स्केल बनाने की एक आम रणनीति है। सितंबर-अक्टूबर 2025 के प्रिफरेंशियल इश्यू से जुटाई गई रकम का इस अधिग्रहण में इस्तेमाल, मैनेजमेंट के ऑर्गेनिक ग्रोथ के साथ-साथ इनऑर्गेनिक ग्रोथ पर भी फोकस को दर्शाता है।
आगे का रास्ता और जोखिम
जहां India Ratings की कन्फर्मेशन फंड के सही उपयोग को लेकर एक भरोसा देती है, वहीं निवेशकों की नजर जून 2024 के प्रिफरेंशियल इश्यू से ₹513.37 करोड़ की राशि को कब तक इस्तेमाल किया जाता है, इस पर रहेगी। इस फंड की देरी से तैनाती, कंपनी की ग्रोथ पहलों की गति को प्रभावित कर सकती है। Profectus Capital का सफल इंटीग्रेशन और ऑपरेशनल स्ट्रक्चर खड़ा करना आने वाले क्वार्टर में एक मुख्य फैक्टर होगा।
UGRO Capital के लिए प्रभावी ढंग से कैपिटल का इस्तेमाल करना, अपने बढ़ते लोन बुक को मैनेज करना और अच्छी एसेट क्वालिटी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। कंपनी की रणनीति अपनी लेंडिंग कैपेसिटी और मार्केट प्रेजेंस को बढ़ाने पर केंद्रित दिख रही है, जिसमें कैपिटल जुटाना और रणनीतिक अधिग्रहण उसके ग्रोथ प्लान के अहम स्तंभ हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये इस्तेमाल किए गए फंड कब तक आय उत्पन्न करना शुरू करते हैं और कंपनी के प्रॉफिटेबिलिटी और रिटर्न रेश्यो में सुधार लाते हैं।