UCO Bank ने अपने लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए **$730 मिलियन** की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई है। यह फंड बैंक को **24.7%** की तेज क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट करने और महंगे डोमेस्टिक डिपॉजिट पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
फंडिंग का नया जरिया
बैंक ने अपने $500 मिलियन के लक्ष्य को पार करते हुए $730 मिलियन की पूंजी जुटाई है। कोलकाता स्थित यह सरकारी बैंक फिलहाल तेजी से लोन बांट रहा है। सितंबर तिमाही में बैंक की क्रेडिट ग्रोथ 24.7% रही, जो कि 12-14% के सालाना गाइडेंस से काफी ज्यादा है।
मार्जिन और कॉस्ट मैनेजमेंट
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि बैंक अब महंगे डोमेस्टिक बल्क डिपॉजिट के बजाय विदेशी मुद्रा जमा का सहारा ले रहा है, जिससे मार्जिन पर दबाव कम होगा। बैंक के MD और CEO इन-चार्ज राजेंद्र कुमार साबू की अगुवाई में मैनेजमेंट का लक्ष्य नेट इंटरेस्ट मार्जिन को 2.8% से 2.9% के दायरे में बनाए रखना है। इसके लिए डिजिटल बैंकिंग और कॉर्पोरेट कैश मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक की खराब स्थिति में भी सुधार दिख रहा है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घटकर सितंबर तक 1.96% रह गए हैं। बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ₹1,910 करोड़ की रिकवरी की है और सालाना ₹2,000-2,500 करोड़ के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।
विस्तार की रणनीति
UCO Bank अपने फिजिकल नेटवर्क को भी बढ़ा रहा है। बैंक मार्च 2027 तक 100-110 नई ब्रांच खोलने की योजना पर काम कर रहा है। हाल ही में GIFT सिटी में शुरू हुई ब्रांच ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसने अकेले ही $350 मिलियन की लेंडिंग एक्टिविटी को सुविधा प्रदान की है।
आने वाले समय में शेयरधारकों को बैंक के क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लोन ग्रोथ के साथ लिक्विडिटी का संतुलन बना रहे।
