रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के हालिया नीतिगत बदलावों का असर अब UCO Bank पर दिखने लगा है। बैंक ने रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट्स में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो **8 अक्टूबर, 2026** से प्रभावी हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की हालिया वृद्धि के बाद, UCO Bank ने अपनी बेंचमार्क लेंडिंग दरों को ऊपर की ओर रिवाइज कर दिया है। यह कदम केंद्रीय बैंक के सख्त रुख के साथ तालमेल बिठाने के लिए उठाया गया है।
नई दरें और प्रभाव
बैंक की एसेट लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी ने स्पष्ट किया है कि 'UCO Float' वेरिएंट के लिए रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) अब 8.05% से बढ़कर 8.30% हो गया है। वहीं, 'UCO Prime' वेरिएंट की दर 5.25% से बढ़कर 5.50% कर दी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन ग्राहकों का लोन इन बेंचमार्क से जुड़ा है, उनकी EMI का बोझ बढ़ जाएगा।
अन्य बेंचमार्क्स में बदलाव
बैंक ने ट्रेजरी बिल-लिंक्ड लेंडिंग रेट्स (TBLR) को भी अपडेट किया है:
- 3-महीने का TBLR: अब 5.30%
- 6-महीने का TBLR: 5.70%
- 12-महीने का TBLR: 5.95%
- 10-साल का सरकारी सिक्योरिटी यील्ड: 7.32%
राहत की खबर
हालांकि, बैंक ने अपने इंटरनल बेंचमार्क्स जैसे मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में कोई बदलाव नहीं किया है। एक साल का MCLR 8.80% पर स्थिर है, जबकि बेस रेट 9.60% और बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) 14.25% पर बरकरार हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ये बढ़ोतरी मुद्रास्फीति (Inflation) को थामने के लिए RBI की 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' नीति का हिस्सा है। हालांकि इससे बैंकों की ब्याज से होने वाली इनकम बढ़ सकती है, लेकिन ऊंची दरें लोन की मांग को सुस्त कर सकती हैं। आने वाले समय में, बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) और क्रेडिट ग्रोथ पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि बढ़ती दरों के बीच मुनाफे को मेंटेन रखना अब एक बड़ी चुनौती है।
