Two-Wheeler Loans: लोन डिफॉल्ट में बड़ी गिरावट, **1.4%** के 7 साल के निचले स्तर पर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Two-Wheeler Loans: लोन डिफॉल्ट में बड़ी गिरावट, **1.4%** के 7 साल के निचले स्तर पर

जून 2026 तक टू-व्हीलर लोन में डिफॉल्ट की दर घटकर **1.4%** पर आ गई है, जो पिछले 7 सालों का सबसे निचला स्तर है। लेंडर्स अब स्मार्टफोन जैसी छोटी EMI के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके ग्राहकों की क्रेडिट हिस्ट्री को बेहतर समझ रहे हैं, हालांकि अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन का बढ़ता बोझ निवेशकों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।

भारत में टू-व्हीलर फाइनेंसिंग का पूरा गणित बदल गया है। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, लोन डिफॉल्ट रेट गिरकर 1.4% हो गया है, जो 2019 में 2.7% हुआ करता था। यह सुधार केवल आर्थिक स्थिति में सुधार का नतीजा नहीं है, बल्कि लेंडिंग के तरीके में आए बड़े बदलाव का परिणाम है।

'स्मॉल-टिकट' फिल्टर का कमाल

अब बैंक और NBFCs बड़े लोन देने से पहले ग्राहकों के छोटे लोन के ट्रैक रिकॉर्ड को परख रहे हैं। स्मार्टफोन, घरेलू उपकरण या गोल्ड लोन जैसी छोटी EMI चुकाने के तरीके से लेंडर्स को पता चल जाता है कि ग्राहक कितना अनुशासित है। 2026 की पहली छमाही तक, करीब 1/3 नए टू-व्हीलर उधारकर्ताओं ने ये छोटे क्रेडिट प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए थे। इसका असर यह हुआ कि 801 से ऊपर 'प्राइम' क्रेडिट स्कोर वाले उधारकर्ताओं की संख्या दोगुना होकर 16% पर पहुंच गई है।

NBFCs की बढ़ती पकड़

टू-व्हीलर लोन मार्केट में 73% हिस्सेदारी के साथ NBFCs अभी भी लीडर बने हुए हैं। इनका पूरा फोकस अब सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों पर है, जहां से कुल नए व्हीकल लोन का 64% हिस्सा आ रहा है। इन इलाकों में लोग टू-व्हीलर से अपग्रेड होकर बड़े पैसेंजर व्हीकल की ओर बढ़ रहे हैं, जो इन फाइनेंस कंपनियों के लिए ग्रोथ का नया इंजन है।

निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)

हालाँकि डिफॉल्ट रेट में कमी निवेशकों के लिए अच्छी खबर है, लेकिन जोखिम अभी भी बरकरार हैं। टू-व्हीलर लोन मुख्य रूप से 'अनसिक्योर्ड' श्रेणी में आते हैं, जहां कोई ठोस कोलेटरल (Collateral) नहीं होता जिसे आसानी से बेचा जा सके। कई ग्राहक एक साथ कई अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन ले रहे हैं, जो भविष्य में तनाव पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, रेगुलेटरी वॉचडॉग की ओर से ब्याज दरों या लोन रिकवरी नियमों में बदलाव NBFCs के मुनाफे पर असर डाल सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे क्रेडिट साइकिल के बदलते ही लेंडर्स की कॉस्ट मैनेजमेंट और डिफॉल्ट कंट्रोल करने की क्षमता पर नजर बनाए रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.