Trust Mutual Fund भारतीय कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स पर दांव लगा रहा है। फंड हाउस का मानना है कि इन सेक्टर्स में लंबी अवधि की ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं हैं। महंगे वैल्यूएशन के बावजूद, फंड का इक्विटी एक्सपोजर हाई है और यह फाइनेंशियलाइजेशन (Financialization) और गोल्ड (Gold) जैसे थीम्स पर फोकस कर रहा है।
वैल्यूएशन पर Trust MF का नज़रिया
Trust Mutual Fund ने भारत के लॉन्ग-टर्म कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) साइकिल पर अपना भरोसा जताया है, भले ही बाजार में वैल्यूएशन (Valuation) थोड़ी ऊंची बनी हुई हो। फंड हाउस, जो आमतौर पर 95% से 98% तक इक्विटी में निवेश करता है, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, पावर ट्रांसमिशन और डेटा सेंटर्स जैसे सेक्टर्स पर फोकस कर रहा है, जो सीधे भारत की ग्रोथ स्टोरी से जुड़े हैं।
Trust MF के CEO, संदीप बग्गा (Sandeep Bagla) का कहना है कि हालिया बाजार एडजस्टमेंट के कारण वैल्यूएशन की चिंताएं वैसी नहीं रहीं जैसी दो साल पहले थीं। फंड के अनुसार, प्राइस और टाइम करेक्शन के साथ-साथ करेंसी वैल्यूएशन में हुए बदलावों ने भारतीय इक्विटी मार्केट के कुछ हिस्सों को अधिक तर्कसंगत बना दिया है। ग्लोबल आर्थिक दबावों के बावजूद, कंपनी ने लगातार GST कलेक्शन, स्थिर क्रेडिट ग्रोथ और मजबूत ऑटो बिक्री जैसे घरेलू संकेतकों का हवाला देते हुए अर्थव्यवस्था की मजबूती पर प्रकाश डाला है।
फाइनेंशियलाइजेशन और गोल्ड पर फोकस
कैपेक्स के अलावा, फंड घरेलू बचत के फाइनेंशियल एसेट्स (Financial Assets) में शिफ्ट होने की संरचनात्मक प्रवृत्ति पर दांव लगा रहा है। Chief Investment Officer, मिहिर वोरा (Mihir Vora) ने बताया कि इस ट्रेंड से वेल्थ मैनेजर्स, बीमा कंपनियों, स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकरेज फर्मों को फायदा होने की उम्मीद है। साथ ही, फंड गोल्ड जैसी कीमती धातुओं पर भी पॉजिटिव रुख बनाए हुए है। इस रणनीति का आधार यह उम्मीद है कि विकसित पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते कर्ज का स्तर अंततः मौद्रिक ढील (Monetary Easing) का कारण बन सकता है, एक ऐसा माहौल जो ऐतिहासिक रूप से गोल्ड की कीमतों को सहारा देता है।
पोर्टफोलियो प्राथमिकताएं और सावधानियां
जहां फंड निवेश चक्र और प्रीमियम कंजम्पशन से जुड़े सेक्टर्स के बारे में आशावादी है, वहीं यह अन्य क्षेत्रों में सावधानी बरत रहा है। फंड हाउस ने संकेत दिया है कि उसे पब्लिक सेक्टर बैंक, फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) और लार्ज-कैप आईटी (IT) कंपनियों में कम आकर्षक अवसर मिल रहे हैं। यह सेलेक्टिव अप्रोच ब्रॉड मार्केट पार्टिसिपेशन के बजाय स्पेसिफिक थीम्स को प्राथमिकता देता है।
ग्लोबल कॉन्टेक्स्ट और भविष्य का आउटलुक
Trust MF ने हालिया फॉरेन पोर्टफोलियो फ्लो (Foreign Portfolio Flows) पर भी बात की। उन्होंने नोट किया कि कुछ एशियाई बाजारों की तुलना में भारत का अस्थायी अंडरपरफॉर्मेंस संभवतः निवेशकों के ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में AI-संबंधित अवसरों की ओर पूंजी स्थानांतरित करने के कारण है। फंड का मानना है कि यह भारत की फंडामेंटल ग्रोथ प्रोस्पेक्ट्स में बदलाव के बजाय ग्लोबल पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का मामला है। निवेशकों के लिए, अगला महत्वपूर्ण बिंदु यह देखना होगा कि क्या पसंदीदा Capex और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स की कंपनियां आने वाली तिमाहियों में अपनी मौजूदा वैल्यूएशन मल्टीपल्स को सही ठहराने के लिए आवश्यक सस्टेन्ड अर्निंग ग्रोथ (Sustained Earnings Growth) दे पाती हैं या नहीं।
