Tirupati Fincorp Share: RBI के आदेशों की अवहेलना, ऑडिटर की चेतावनी से मचा हड़कंप!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Tirupati Fincorp Share: RBI के आदेशों की अवहेलना, ऑडिटर की चेतावनी से मचा हड़कंप!
Overview

Tirupati Fincorp Limited ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में अपने नेट लॉस को घटाकर **₹260.26 लाख** कर लिया है, जो पिछले साल की समान अवधि से बेहतर है। हालांकि, ऑडिटर की एक रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी RBI द्वारा परिचालन बंद करने के आदेश के बावजूद फाइनेंसिंग एक्टिविटीज जारी रखे हुए है। साथ ही, लोन डॉक्यूमेंट्स की जांच असंभव पाई गई और इंटरनल कंट्रोल्स बेहद कमजोर मिले। इन चिंताओं के बीच, कंपनी की कुल आय में **~92.6%** की भारी गिरावट दर्ज की गई।

RBI के आदेश की अनदेखी और ऑडिटर के गंभीर आरोप

Tirupati Fincorp Limited (TFL) के लिए मुसीबतें कम होती नहीं दिख रहीं। हालिया नतीजों के बीच, कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटर, JCR & CO. LLP, ने कई गंभीर चिंताओं पर प्रकाश डाला है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस आदेश के बावजूद फाइनेंसिंग एक्टिविटीज जारी रखे हुए है, जिसमें RBI ने 30 अप्रैल, 2019 से कंपनी का NBFC सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था और 19 मई, 2025 को एक ताजा आदेश जारी कर तुरंत कामकाज बंद करने को कहा था। हालांकि कंपनी ने 11 अगस्त, 2025 को एक बोर्ड रेजोल्यूशन पास कर NBFC ऑपरेशन्स बंद करने का निर्णय लिया था, लेकिन ऑडिटर की रिपोर्ट बताती है कि कंपनी ने नया बिज़नेस करना जारी रखा है।

नतीजों पर छाई चिंताओं की काली घटा

इन सब चिंताओं के बीच, कंपनी के वित्तीय नतीजे भी कुछ खास अच्छे नहीं हैं। Q3 FY26 में TFL ने ₹260.26 लाख का नेट लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के ₹669.20 लाख के लॉस से कम है। लेकिन, तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय (Total Income) में पिछले साल की तुलना में करीब 92.61% की भारी गिरावट आई है, जो गिरकर केवल ₹278.06 लाख रह गई। यह गिरावट मुख्य रूप से इंटरेस्ट इनकम में आई भारी कमी के कारण हुई है। इसी तिमाही में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में भी 30.88% की गिरावट देखी गई।

वहीं, 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए, रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स पिछले साल के मुकाबले 92.97% बढ़कर ₹1,150.91 लाख हो गया। हालांकि, इसी अवधि के लिए कुल आय में 79.99% की गिरावट आई और यह ₹2,101.99 लाख पर आ गई। इस नौ महीने की अवधि के लिए नेट लॉस भी पिछले साल के ₹735.90 लाख से घटकर ₹138.60 लाख रह गया।

अन्य रेड फ्लैग्स और जोखिम

ऑडिटर की चिंताएं यहीं खत्म नहीं होतीं। वे तिमाही के दौरान दिए और लिए गए लोन के डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध न होने के कारण इंटरेस्ट एक्सपेंस की सटीकता को सत्यापित करने में असमर्थ रहे। कंपनी के लेंडिंग बिज़नेस के लिए इंटरनल कंट्रोल्स में भी कई कमियां पाई गईं, जिन्हें तुरंत ठीक करने की ज़रूरत है। इसके अलावा, कंपनी की वेबसाइट भी SEBI (LODR) रेगुलेशन्स, 2015 के अनुरूप नहीं पाई गई।

कंपनी फिलहाल RBI से अनुपालन (compliance) के लिए छह महीने का एक्सटेंशन मांग रही है। TFL के लिए सबसे बड़ा जोखिम RBI द्वारा की जाने वाली कोई भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें भारी जुर्माना या कंपनी को बंद करने का आदेश भी शामिल हो सकता है। लोन डॉक्यूमेंट्स की जांच न हो पाना और कमजोर इंटरनल कंट्रोल्स कंपनी के लिए बड़े फाइनेंशियल और ऑपरेशनल जोखिम पैदा करते हैं। RBI के फैसले पर कंपनी का भविष्य टिका है, खासकर NBFC के तौर पर उसकी निरंतरता अनिश्चित है। निवेशक इस मामले पर पैनी नज़र रखें।

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