Digital Credit: छोटे शहरों में बढ़ रहा डिजिटल क्रेडिट का क्रेज, मेट्रो सिटीज को छोड़ा पीछे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Digital Credit: छोटे शहरों में बढ़ रहा डिजिटल क्रेडिट का क्रेज, मेट्रो सिटीज को छोड़ा पीछे

डिजिटल क्रेडिट एंड इन्क्लूजन इंडेक्स 2026 के मुताबिक, Tier-2 शहरों ने डिजिटल क्रेडिट अपनाने में बड़े मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि **88%** लोगों को इसकी जानकारी है, लेकिन असल इस्तेमाल केवल **31%** ही हो रहा है, जो भरोसे की कमी को दर्शाता है।

भारत में डिजिटल उधार का परिदृश्य बदल रहा है। पहे इंडिया फाउंडेशन (Pahlé India Foundation) और Amazon Pay द्वारा जारी डिजिटल क्रेडिट एंड इन्क्लूजन इंडेक्स (DCII) 2026 के अनुसार, Tier-2 शहरों ने 58.64 के इंडेक्स स्कोर के साथ बाजी मार ली है। यह स्कोर Tier-3 शहरों (55.77) और Tier-1 मेट्रो शहरों (53.1) से काफी बेहतर है।

भरोसे का संकट (Trust Deficit)

रिपोर्ट में सबसे बड़ी बाधा 'ट्रस्ट डेफिसिट' को बताया गया है। ग्राहक पेमेंट ऐप्स पर भरोसा तो कर रहे हैं (ट्रस्ट स्कोर 74.4), लेकिन क्रेडिट फीचर्स का उपयोग करने में उनका भरोसा घटकर 52.5 रह जाता है। फिनटेक कंपनियों के लिए चुनौती तकनीक की नहीं, बल्कि सुरक्षा और फ्रॉड प्रोटेक्शन को लेकर ग्राहकों के मन में भरोसा जगाने की है।

खपत बनाम निवेश

फिलहाल डिजिटल क्रेडिट का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंजम्पशन के लिए हो रहा है। करीब 59% लोन का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज खरीदने में किया जा रहा है। इसका मतलब है कि अभी भी क्रेडिट का इस्तेमाल वेल्थ क्रिएशन या बिजनेस इन्वेस्टमेंट के लिए कम हो रहा है।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और रिस्क

एक सकारात्मक पहलू यह है कि डिजिटल क्रेडिट के मामले में वेतनभोगी महिलाएं (62.0 का स्कोर) पुरुषों (60.2 का स्कोर) से आगे निकल रही हैं। हालांकि, कंपनियों के लिए असली चुनौती इन इलाकों में 'अंडरराइटिंग मॉडल्स' को सुधारने की है, क्योंकि पारंपरिक क्रेडिट स्कोर सिस्टम अक्सर असंगठित क्षेत्र के कामगारों की साख मापने में सक्षम नहीं होते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.