डिजिटल क्रेडिट एंड इन्क्लूजन इंडेक्स 2026 के अनुसार, टियर-2 शहर अब डिजिटल कर्ज के मामले में बड़े मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ रहे हैं। इस बदलाव में कामकाजी महिलाएं सबसे आगे हैं, लेकिन कर्ज का इस्तेमाल अभी भी केवल उपभोग तक सीमित है।
बड़े शहरों को पछाड़ रहे छोटे शहर
'डिजिटल क्रेडिट एंड इन्क्लूजन इंडेक्स 2026' की रिपोर्ट ने भारतीय वित्तीय बाजार की नई तस्वीर पेश की है। Pahle India Foundation और Amazon Pay द्वारा तैयार इस इंडेक्स में टियर-2 शहरों ने 58.64 का स्कोर हासिल किया है, जो टियर-1 शहरों के 53.1 और टियर-3 शहरों के 55.7 स्कोर से काफी बेहतर है। कोयंबटूर, सूरत, नागपुर और इंदौर जैसे शहर इस डिजिटल क्रांति का केंद्र बन गए हैं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इस रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि छोटे शहरों में जेंडर गैप कम हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, कामकाजी महिलाएं डिजिटल क्रेडिट के इस्तेमाल में पुरुषों से आगे निकल गई हैं। यह संकेत है कि बड़े महानगरों के मुकाबले छोटे इलाकों में वित्तीय समावेश (Financial Inclusion) अधिक संतुलित हो रहा है।
कंजम्पशन पर अधिक जोर
हालांकि क्रेडिट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन इसका मकसद अभी भी सीमित है। रिपोर्ट के अनुसार, 59% यूजर्स डिजिटल क्रेडिट का उपयोग केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान खरीदने के लिए कर रहे हैं। निवेश या बिजनेस जैसी उत्पादक गतिविधियों के लिए इस कर्ज का इस्तेमाल अभी भी बहुत कम है।
आगे की राह और चुनौतियां
Amazon Pay India के मुताबिक, उनका 75% कस्टमर बेस टियर-2 और टियर-3 शहरों में है, जो छोटे शहरों की बड़ी कमर्शियल ताकत को दर्शाता है। हालांकि, समस्या यह है कि कैश की कमी होने पर लोग अब भी डिजिटल लोन ऐप्स के बजाय पुरानी बचत पर निर्भर रहना बेहतर समझते हैं। फिनटेक कंपनियों के लिए अब चुनौती यह है कि वे कर्ज को उपभोग से हटाकर लंबी अवधि की वित्तीय योजना की ओर कैसे ले जाएं, ताकि यूजर्स पर कर्ज का बोझ न बढ़े।
