Health Insurance Market: टियर-2 और टियर-3 शहरों में आया बूम, 67% हिस्सेदारी के साथ बदला मार्केट का नक्शा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Health Insurance Market: टियर-2 और टियर-3 शहरों में आया बूम, 67% हिस्सेदारी के साथ बदला मार्केट का नक्शा

हेल्थ इंश्योरेंस बाजार में अब टियर-2 और टियर-3 शहरों का दबदबा है। नए खरीदारों में इन शहरों की हिस्सेदारी बढ़कर **67%** हो गई है, जबकि औसत कवर भी बढ़कर **₹13.1 लाख** तक पहुंच गया है।

भारत के हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ग्रोथ का इंजन महानगर नहीं बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर बन गए हैं। इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, FY26 तक पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों में इन छोटे शहरों की हिस्सेदारी 67% हो गई है, जो चार साल पहले 56% थी। इस दौरान इन इलाकों में नए पॉलिसीधारकों की संख्या में 351% का जबरदस्त उछाल आया है।

औसत कवर में दोगुना इजाफा

उपभोक्ताओं की पसंद में भी बड़ा बदलाव आया है। पिछले चार सालों में औसत सम इंश्योर्ड (Sum Insured) यानी क्लेम की अधिकतम सीमा ₹6.3 लाख से बढ़कर ₹13.1 लाख पर पहुंच गई है। FY26 तक करीब 68% नए ग्राहकों ने ₹10 लाख या उससे ज्यादा का कवर चुना, जबकि FY22 में यह आंकड़ा सिर्फ 32% था। इस तेजी के पीछे सितंबर 2025 में प्रीमियम से GST हटने का बड़ा हाथ रहा है, जिसने ग्राहकों को बड़े कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया है।

जेंडर गैप और चुनौतियां

अब युवा खरीदार, खासकर 26 से 45 साल की उम्र के लोग इस मार्केट का आधा हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, एक गंभीर चुनौती 'जेंडर गैप' की बनी हुई है। कुल नई पॉलिसीज में पुरुषों की हिस्सेदारी 82% है, जबकि महिलाएं सिर्फ 18% हैं। यह दिखाता है कि कंपनियों को छोटे शहरों की महिलाओं की वित्तीय जरूरतों को समझने और उन्हें जोड़ने के लिए अभी काफी मेहनत करनी होगी।

निवेशकों के लिए संकेत

इन्वेस्टर्स के नजरिए से देखें तो ऊंचे सम इंश्योर्ड का मतलब है प्रीमियम में बढ़ोतरी, जिससे कंपनियों की कमाई बढ़ सकती है। हालांकि, इन नए बाजारों में हाई कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट और जटिल प्रॉडक्ट्स को आसान बनाना कंपनियों के लिए मार्जिन बनाए रखने की मुख्य चुनौती होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.