भारतीय शेयर बाज़ारों में शुक्रवार को ज़बरदस्त रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) लगभग **1,000 अंक** चढ़ गया, जिसकी मुख्य वजह आईटी (IT) और बैंकिंग शेयरों में हुई ताबड़तोड़ खरीदारी रही। Tech Mahindra के शानदार तिमाही नतीजों और रिकॉर्ड डील से स्टॉक में उछाल आया, वहीं Reliance Industries के नतीजे आने से पहले तेज़ी देखी गई। हालांकि, मुख्य सूचकांकों के चढ़ने के बावजूद मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप (Smallcap) शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
Tech Mahindra के नतीजों से IT सेक्टर में जोश
टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) Tech Mahindra के जून तिमाही के प्रदर्शन के बाद और मज़बूत हुआ। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछले तिमाही के मुकाबले 4.2% बढ़कर ₹15,711.9 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, ऑपरेटिंग प्रॉफिट (Operating Profit) यानी EBIT में 8.6% की बढ़ोतरी देखी गई, जो कंपनी की बेहतर एफिशिएंसी (Efficiency) का संकेत देता है। स्टॉक में 5% की तेज़ी का एक बड़ा कारण नए सौदों (Deal Wins) की घोषणा रही, जो कुल $1.078 बिलियन के रहे। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 33.3% ज़्यादा है। निवेशक इसे आईटी सेवाओं, खासकर जेनरेटिव एआई (Generative AI) जैसे नए टेक एरिया में लगातार मांग का संकेत मान रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद, HCLTech, Infosys और Persistent Systems जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी तेज़ी आई।
बैंकिंग और Reliance Industries ने संभाला बाज़ार
लार्ज-कैप (Large-cap) हैवीवेट (Heavyweight) कंपनियों ने बाज़ार की इस तेज़ी में अहम भूमिका निभाई। Reliance Industries के शेयर 2.37% चढ़े, क्योंकि निवेशक कंपनी के तिमाही नतीजों के ऐलान से पहले पोज़िशन (Position) ले रहे थे। फाइनेंशियल स्पेस (Financial Space) में, Nifty प्राइवेट बैंक इंडेक्स (Nifty Private Bank Index) 2.05% चढ़ा। Sensex शेयरों में Kotak Mahindra Bank सबसे आगे रहा और 3.41% की तेज़ी दर्ज की। HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और State Bank of India जैसे अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों में भी ज़बरदस्त खरीदारी देखी गई।
ग्लोबल एनर्जी और करेंसी का जोखिम
लार्ज-कैप शेयरों के लिए यह एक पॉजिटिव दिन रहा, लेकिन अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताएं बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें $85 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में लगातार ऊंचे एनर्जी प्राइस (Energy Price) देश की महंगाई पर असर डाल सकते हैं और रुपये पर दबाव बढ़ा सकते हैं। कमज़ोर रुपया अक्सर भारतीय बाज़ार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भागीदारी को जटिल बना देता है। इसके अलावा, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में कमजोरी यह दर्शाती है कि भले ही टॉप-टियर (Top-tier) कंपनियाँ पूंजी आकर्षित कर रही हैं, लेकिन छोटी कंपनियाँ अभी भी दबाव का सामना कर रही हैं। निवेशक आने वाले दिनों में प्रमुख वित्तीय संस्थानों और Reliance Industries की अर्निंग्स रिपोर्ट (Earnings Report) पर नज़र रखेंगे, क्योंकि ये नतीजे सेक्टर-व्यापी ग्रोथ (Growth) और मैनेजमेंट के आउटलुक (Outlook) पर और स्पष्टता प्रदान करेंगे।
