भारत के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बैंक से मिलने वाले कर्ज में पिछले दो सालों में दोगुना इजाफा हुआ है। यह बढ़कर **₹53,859 करोड़** हो गया है। डेटा सेंटर्स, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और साइबर सुरक्षा में भारी निवेश के कारण ऐसा हुआ है। इससे IT कंपनियों का पारंपरिक तरीका बदला है, जो पहले खुद के पैसों पर निर्भर करती थीं।
टेक इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में क्यों बढ़ा कर्ज?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बैंक से होने वाले लोन में भारी उछाल आया है। जून 2026 तक यह राशि बढ़कर ₹53,859 करोड़ हो गई है, जो कि दो साल पहले ₹26,667 करोड़ थी। साफ है कि इस सेक्टर ने पिछले दो सालों में दोगुना कर्ज लिया है। यह दिखाता है कि भारतीय टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम अपने विकास के लिए अब केवल अपनी बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि बैंकों से मिलने वाले फाइनेंसिंग का भी भरपूर इस्तेमाल कर रहा है।
कर्ज मांग के मुख्य कारण
इस बढ़ते कर्ज की मांग का मुख्य कारण देश भर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार है। कंपनियां लगातार डेटा सेंटर्स के निर्माण और संचालन के लिए पैसा जुटा रही हैं। इन डेटा सेंटर्स में भारी शुरुआती निवेश की जरूरत होती है, जिसमें बिल्डिंग, सर्वर और क्लाउड इक्विपमेंट शामिल हैं। इसके अलावा, मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा भारत में खोले जा रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भी कर्ज की मांग बढ़ाने में बड़ा योगदान दे रहे हैं। इन सेंटर्स के जरिए कंपनियां अपने इंटरनल ऑपरेशन्स को संभालती हैं। इन सबके अलावा, स्थानीय डेटा स्टोरेज नियमों का पालन करने, कॉरपोरेट एक्विजिशन (कंपनियों का अधिग्रहण) से जुड़े खर्चों और संवेदनशील डिजिटल एसेट्स की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) को मजबूत करने की जरूरतें भी इस लोन ग्रोथ को बढ़ावा दे रही हैं।
पुराने IT फंडिंग मॉडल से बदलाव
पहले भारतीय IT सेक्टर अपनी मजबूत बैलेंस शीट के लिए जाना जाता था। कई बड़ी सॉफ्टवेयर और IT सर्विस कंपनियां बहुत कम कर्ज लेकर काम करती थीं और अपने ऑपरेशन्स व विस्तार के लिए खुद के कैश फ्लो पर भरोसा करती थीं। लेकिन, अब कर्ज लेने का यह नया पैटर्न सेक्टर में विविधता ला रहा है। जहां टॉप-TIER IT कंपनियां अभी भी अच्छी लिक्विडिटी बनाए हुए हैं, वहीं मिड-TIER फर्म्स, स्टार्टअप्स और स्पेशलाइज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स वर्किंग कैपिटल और प्री-शिपमेंट क्रेडिट लेने के लिए बैंकिंग सिस्टम का रुख कर रहे हैं। यह बदलाव नए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोनॉमी की पूंजी-गहन (capital-intensive) प्रकृति को दर्शाता है, जो पारंपरिक सर्विस-ओरिएंटेड IT मॉडल से काफी अलग है।
निवेशकों के लिए देखने लायक बातें
जैसे-जैसे इस सेक्टर में बैंक क्रेडिट तेजी से बढ़ रहा है, निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कर्ज का यह बढ़ा हुआ उपयोग लंबी अवधि में इन कंपनियों की वित्तीय सेहत को कैसे प्रभावित करता है। बैंक लोन से क्षमता निर्माण और विस्तार में तेजी आ सकती है, लेकिन इससे इंटरेस्ट कॉस्ट (ब्याज लागत) और पुनर्भुगतान (repayment) की जिम्मेदारियां भी आती हैं, जो पारंपरिक IT बिजनेस मॉडल का हिस्सा नहीं थीं। निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या डेटा सेंटर्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया यह निवेश बढ़ती हुई बोरिंग्स को सही ठहराने लायक सस्टेनेबल रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की ओर ले जाता है। जैसे-जैसे यह सेक्टर परिपक्व (mature) हो रहा है, इन लोन्स की क्रेडिट क्वालिटी और इन टेक्नोलॉजी एंटिटीज की डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) को मैनेज करने की क्षमता पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
