REIT और InvIT डिविडेंड पर टैक्स में बड़ी राहत! निवेशकों के लिए क्या हैं नए नियम?

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AuthorAditya Rao|Published at:
REIT और InvIT डिविडेंड पर टैक्स में बड़ी राहत! निवेशकों के लिए क्या हैं नए नियम?

लोकसभा में पास हुआ Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026. अब REIT और InvIT से मिलने वाला डिविडेंड इनकम (Dividend Income) टैक्स-फ्री होगा, चाहे SPV कोई भी टैक्स रीजीम चुने। हालांकि, निवेशकों को ध्यान देना होगा कि केवल 'डिविडेंड' हिस्सा ही टैक्स-फ्री है। ब्याज (Interest) और किराये की आय (Rental Income) जैसे अन्य वितरण पर टैक्स लगेगा।

टैक्स बिल में क्या हैं बड़े बदलाव?

6 अगस्त 2026 को लोकसभा में Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पास हुआ, जिसने Real Estate Investment Trusts (REITs) और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) से होने वाली कमाई पर टैक्स के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। अब, इन ट्रस्टों द्वारा निवेशकों को बांटे जाने वाले डिविडेंड पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह छूट तब भी मिलेगी जब SPV (Special Purpose Vehicle) पुराना कॉर्पोरेट टैक्स रीजीम चुने या नया, सस्ता वाला।

पहले यह टैक्स-फ्री स्टेटस केवल तभी मिलता था जब SPV पुराने टैक्स ढांचे का पालन करता था। इससे निवेशकों को मिलने वाली कमाई पर सीधा असर पड़ता था। नए नियमों से ट्रस्टों को ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी और निवेशकों का अनुभव भी बेहतर होगा।

SPVs के लिए क्या है कीमत?

निवेशकों के लिए रास्ता भले ही आसान हुआ हो, लेकिन ट्रस्टों को मैनेज करने वाली कंपनियों के लिए एक बदलाव है। जो SPVs नए, सस्ते कॉर्पोरेट टैक्स रीजीम को चुनेंगे, उन पर अब 25% का सरचार्ज लगेगा, जो पहले 10% था। इससे टैक्स का बोझ निवेशक से हटाकर SPV पर आ गया है। एनालिस्ट्स इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि यह बदलाव निवेशकों को बांटे जाने वाले मुनाफे (Profit) पर कैसे असर डालेगा।

निवेशक क्यों चेक करें डिस्ट्रिब्यूशन स्टेटमेंट?

यह न सोचें कि REIT या InvIT से मिला हर रुपया टैक्स-फ्री है। मिलने वाली रकम में अलग-अलग तरह की इनकम शामिल होती है, और टैक्स छूट केवल 'डिविडेंड' वाले हिस्से पर ही लागू होती है। पेमेंट के बाकी हिस्सों में ब्याज (Interest) और किराये की आय (Rental Income) शामिल हो सकती है, जिन पर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा। इसके अलावा, कैपिटल रिपेमेंट पर भी टैक्स नहीं लगता, लेकिन यूनिट्स बेचने पर कैपिटल गेन (Capital Gain) की गणना में इसका असर पड़ेगा।

टैक्स नोटिस या ऑडिट से बचने के लिए, निवेशकों को ट्रस्ट द्वारा दिए गए Form 64B या डिस्ट्रिब्यूशन स्टेटमेंट को ध्यान से देखना चाहिए। ये डॉक्यूमेंट पेमेंट को टैक्स-फ्री और टैक्सेबल हिस्सों में बांटते हैं, जो इनकम टैक्स फाइलिंग के लिए ज़रूरी है। यह मान लेना कि सब कुछ टैक्स-फ्री है, टैक्स देनदारी को कम बताने का कारण बन सकता है।

बाज़ार का हाल और अगला कदम

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत का लिस्टेड REIT मार्केट लगातार बढ़ रहा है। FY 2025-26 के आखिर तक, इस सेक्टर में कुल वितरण ₹8,900 करोड़ से ज़्यादा था। जैसे-जैसे मार्केट बढ़ेगा, SPVs के नए टैक्स रीजीम की ओर बढ़ने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी, क्योंकि उन्हें मौजूदा Minimum Alternate Tax (MAT) क्रेडिट के इस्तेमाल का भी प्रबंधन करना होगा।

फिलहाल, यह बिल राज्यसभा में पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतज़ार कर रहा है। जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं और कानून की सूचना नहीं मिल जाती, तब तक पुराने टैक्स नियम ही लागू रहेंगे। निवेशकों को बिल की अंतिम सूचना और SPVs के ट्रांज़िशन प्रोसेस के संबंध में टैक्स अथॉरिटीज़ द्वारा जारी किए जाने वाले किसी भी दिशा-निर्देश पर नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.