Tata Trusts ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से कानूनी अड़चनों को दूर करने की अपील की है, जिसके चलते Tata Sons की AGM टल गई थी और नए चेयरमैन की तलाश भी रुक गई है।
टाटा ग्रुप फिलहाल एक दुर्लभ गवर्नेंस चुनौती से जूझ रहा है, जिसने Tata Sons के अगले चेयरमैन की चयन प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। Sir Ratan Tata Trust (SRTT) पर लगे कानूनी फ्रीज के कारण, ग्रुप को पहली बार अपनी 18 अगस्त 2026 की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित करनी पड़ी। इस संकट से निकलने के लिए नोएल टाटा के नेतृत्व में ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास औपचारिक अपील दायर की है, ताकि प्रतिबंध हटाए जा सकें और बोर्ड गतिविधियां फिर शुरू हो सकें।
रुकावट की वजह क्या है?
यह गवर्नेंस संकट मई में जारी किए गए उस आदेश के कारण आया है, जिसमें चैरिटी कमिश्नर ने Sir Ratan Tata Trust को बोर्ड फैसलों में सक्रिय भाग लेने से रोक दिया था। चूंकि SRTT, Tata Sons का एक प्रमुख शेयरहोल्डर है, इसलिए इस कानूनी फ्रीज ने पूरी प्रक्रिया में बॉटलनेक पैदा कर दिया है। कोरम (Quorum) पूरा न हो पाने के कारण कंपनी अपनी AGM आयोजित नहीं कर सकी।
नेतृत्व पर क्या असर होगा?
मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। उत्तराधिकारी चुनने के लिए 5 सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन होना था, लेकिन ट्रस्ट की भागीदारी पर लगी रोक के कारण यह प्रक्रिया अधर में लटक गई है। इससे इतने बड़े ग्रुप के भविष्य के मैनेजमेंट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ऑपरेशनल बाधाएं
AGM टलने के कारण फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को मंजूरी देने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े फैसले लेने में दिक्कतें आ रही हैं। ग्रुप ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से 3 महीने का एक्सटेंशन लिया है। डैरियस खंबाटा और जहांगीर एचसी जहांगीर जैसे ट्रस्टी अब रेगुलेटर से विशेष अनुमति मांग रहे हैं ताकि मीटिंग्स और सक्सेशन कमेटी के गठन का रास्ता साफ हो सके।
निवेशकों के लिए संकेत
मार्केट की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या रेगुलेटर से राहत मिलती है या मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंचता है। अगर समाधान में देरी हुई, तो FY26 के खातों को अंतिम रूप देने और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
