Tata Trusts के ट्रस्टियों के बीच छिड़े गवर्नेंस विवाद ने Tata Sons की राह मुश्किल कर दी है। इस डेडलॉक के कारण कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) रुक गई है, जिससे निवेशकों के **₹4,474 करोड़** के डिविडेंड फंस गए हैं और FY26 के फाइनेंशियल अकाउंट्स भी लटक गए हैं।
टाटा ट्रस्ट्स के अंदर चल रहे नेतृत्व और गवर्नेंस के विवाद ने अब महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय तक दस्तक दे दी है। इस खींचतान के कारण टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, Tata Sons के कामकाज में बड़ी रुकावटें आ गई हैं, जिससे न तो AGM हो पा रही है और न ही शेयरधारकों को उनका पैसा मिल पा रहा है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह तनाव 17 सितंबर को हुई एक बोर्ड मीटिंग के बाद और बढ़ गया। इस मीटिंग में N Chandrasekaran को फरवरी 2027 से शुरू होने वाले तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने पर वोटिंग हुई थी। 4-1 से प्रस्ताव पास तो हो गया, लेकिन Noel Tata ने इसके खिलाफ वोट किया। इसके बाद Venu Srinivasan, जो कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं, ने इसे लेकर रेगुलेटर के पास चुनौती पेश कर दी है।
निवेशकों पर क्या है असर?
इस प्रशासनिक गतिरोध (Deadlock) के कारण 18 अगस्त को होने वाली AGM कोरम की कमी के चलते टाल दी गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि कंपनी अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स को अंतिम रूप नहीं दे पाई है। नतीजतन, ₹4,474 करोड़ का डिविडेंड अभी भी फंसा हुआ है, जिससे शेयरधारकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
आगे क्या होगा?
यह लड़ाई केवल चेयरमैन पद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें Tata Sons की पब्लिक लिस्टिंग और Shapoorji Pallonji Group की 18% हिस्सेदारी के मोनेटाइजेशन जैसे बड़े रणनीतिक फैसले भी दांव पर हैं। फिलहाल Noel Tata ने चैरिटी कमिश्नर से अपनी बात रखने की गुहार लगाई है, जबकि Venu Srinivasan ने Noel Tata को आगामी AGM में वोटिंग से रोकने की मांग की है। अब सबकी नजरें रेगुलेटर के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि कंपनी में लीडरशिप का भविष्य क्या होगा और डिविडेंड कब जारी होंगे।
