टाटा ग्रुप के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Tata Trusts ने Tata Sons के चेयरमैन पद पर N Chandrasekaran की पुनर्नियुक्ति को अमान्य करार दिया है। इस फैसले से ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के निवेशकों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
टाटा ग्रुप के भीतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस का एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Tata Sons में 66% की बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले Tata Trusts ने 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें N Chandrasekaran को फिर से चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
क्या है पूरा विवाद?
Tata Trusts का कहना है कि चेयरमैन की नियुक्ति के लिए कंपनी के 'Articles of Association' (संविधान) में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ट्रस्ट्स के अनुसार, प्रमुख फैसलों के लिए उनके द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर्स का समर्थन अनिवार्य है। इस बार, दो नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स में से एक ने इस नियुक्ति के खिलाफ वोट किया था। बोर्ड ने चेयरमैन के कास्टिंग वोट के जरिए इसे पारित करने की कोशिश की, जिसे ट्रस्ट्स ने नियमों का उल्लंघन बताया है।
क्यों चिंतित हैं निवेशक?
हालांकि Tata Sons एक अनलिस्टेड कंपनी है, लेकिन यह TCS, Tata Motors, Tata Steel और Tata Power जैसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है। ऐसे में पैरेंट कंपनी में नेतृत्व की अनिश्चितता का असर ग्रुप की स्ट्रैटेजिक दिशा और भविष्य के फैसलों पर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े ऐसे मामले निवेशकों के लिए जोखिम पैदा करते हैं, क्योंकि इससे ग्रुप के लॉन्ग-टर्म कैपिटल एलोकेशन पर सवाल उठते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कंपनी दोबारा इस प्रक्रिया को पूरा करेगी या फिर मामला कानूनी मध्यस्थता (Arbitration) तक पहुंचेगा। निवेशकों को कंपनी की तरफ से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है ताकि लीडरशिप की स्थिति को लेकर बनी सस्पेंस खत्म हो सके।
