RBI ने Tata Sons की उस अर्जी को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) वाली पहचान छोड़ने की मांग की थी। इस फैसले के बाद Tata Sons के लिए अब पब्लिक लिस्टिंग की राह अनिवार्य हो सकती है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
बुधवार को टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों का यह डर RBI के उस फैसले के बाद बढ़ा है, जिसमें रेगुलेटर ने Tata Sons को अपनी 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' का दर्जा सरेंडर करने की इजाजत नहीं दी।\n\n### RBI का फैसला और लिस्टिंग का दबाव\nइस फैसले के बाद Tata Sons को अब RBI के 'अपर लेयर' (Upper Layer) NBFC वाले नियमों के दायरे में ही काम करना होगा। नियम कहता है कि इस कैटेगरी की कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना ही होगा। पिछले काफी समय से Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर बाजार में अटकलें चलती रही हैं, लेकिन अब रेगुलेटरी दबाव ने इसे और तेज कर दिया है।\n\n### 17 सितंबर की मीटिंग पर नजर\nअब निवेशकों की नजरें 17 सितंबर को होने वाली Tata Trusts की अहम बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में कंपनी के रेगुलेटरी रास्ता, लीडरशिप ट्रांजिशन और गवर्नेंस के मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा पद नहीं संभालेंगे, जिससे एक नए उत्तराधिकारी की खोज भी चर्चा का विषय बनी हुई है।\n\n### गवर्नेंस की चुनौतियां\nमामला सिर्फ रेगुलेटरी नहीं, बल्कि इंटरनल भी है। Sir Ratan Tata Trust फिलहाल कानूनी पचड़ों में फंसा है, जिसके कारण Tata Sons के बोर्ड में प्रतिनिधि चुनने में दिक्कत आ रही है। इन सब खबरों के बीच Tata Investment Corporation और Tata Chemicals जैसे शेयरों में भारी दबाव दिखा, जिससे पूरे ग्रुप के निवेशकों में घबराहट का माहौल है।
