Tata Sons ने Shapoorji Pallonji (SP) Group की हिस्सेदारी खरीदने के लिए **₹25,000 करोड़** के शेयर बायबैक का ऐलान किया है। **18 महीने** की इस प्रक्रिया से दशकों पुराना विवाद खत्म होगा। इसके साथ ही N. Chandrasekaran को फिर से 5 साल के लिए चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
विवाद का पूर्ण विराम
Tata Sons ने Shapoorji Pallonji (SP) Group को टाटा ग्रुप से बाहर निकालने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ₹25,000 करोड़ का यह बायबैक दोनों परिवारों के बीच चल रहे सालों पुराने स्वामित्व विवाद को सुलझाने का एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को 18 महीने में पूरा किया जाएगा और इसके लिए कंपनी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाएगी।
फंड का इंतजाम कैसे होगा?
इतनी बड़ी राशि जुटाने के लिए टाटा ग्रुप कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसमें कंपनी के मौजूदा कैश रिजर्व का उपयोग करना, अपनी कुछ लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी बेचना और विशिष्ट बिजनेस सेगमेंट में बाहरी निवेशकों को शामिल करना शामिल है। निवेशक अब बारीकी से नजर रखे हुए हैं कि फंड जुटाने के इन तरीकों का ग्रुप की बैलेंस शीट और भविष्य की ग्रोथ पर क्या असर पड़ेगा।
मार्केट का रिएक्शन
खबर के आते ही बाजार में रौनक दिखी। Tata Motors के शेयर में 2.8% और Tata Investment Corporation में 4.5% की तेजी दर्ज की गई। वहीं, TCS के शेयर सपाट रहे। इसके अलावा, N. Chandrasekaran के कार्यकाल को अगले 5 साल के लिए बढ़ाए जाने से निवेशकों के बीच स्थिरता का संदेश गया है।
अब निवेशकों की नजरें NCLT की फाइलिंग पर टिकी हैं, जहां बायबैक की समय-सीमा और शर्तों का विस्तार से ब्यौरा सामने आएगा।
