Tata Sons अपने लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए **₹25,000 करोड़** के शेयर बायबैक (Buyback) की तैयारी कर रही है। साथ ही, कंपनी RBI के 'NBFC-Upper Layer' नियमों से बाहर निकलने के लिए अपने बिजनेस स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव कर सकती है।
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons 26 नवंबर को एक बेहद अहम बोर्ड मीटिंग करने जा रही है। इस मीटिंग के एजेंडे में दो बड़े और रणनीतिक फैसले शामिल हैं, जो ग्रुप के भविष्य की दिशा तय करेंगे। इसमें पहला है Shapoorji Pallonji (SP) Group के साथ चल रहे पुराने विवाद का निपटारा और दूसरा है कंपनी के रेगुलेटरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव।
SP ग्रुप के साथ विवाद का अंत
कंपनी ₹25,000 करोड़ के एक सिलेक्टिव शेयर बायबैक के जरिए SP Group की 18.4% हिस्सेदारी को खरीदने की योजना बना रही है। इस डील के तहत पेमेंट 18 महीने की अवधि में किए जाने की उम्मीद है। इसके लिए कंपनी कर्ज लेने के बजाय अपने इंटरनल कैश फ्लो और एसेट मोनेटाइजेशन का सहारा लेगी। शर्त यह है कि डील के बाद SP Group को टाटा के खिलाफ अपने सभी कानूनी दावे वापस लेने होंगे।
रेगुलेटरी बंदिशों से आजादी
फिलहाल Tata Sons RBI की 'NBFC-Upper Layer' कैटेगरी में आती है, जिस पर बैंकों के समान कड़े नियम लागू होते हैं। चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व में कंपनी अब खुद को एक होल्डिंग कंपनी से बदलकर 'ऑपरेटिंग कंपनी' बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए Tata Electronic Systems Solutions और Tata Consulting Engineers जैसी सब्सिडियरीज को मूल कंपनी में मर्ज करने पर विचार किया जा रहा है।
अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो कंपनी को RBI से 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' लेना होगा और फिर National Company Law Tribunal (NCLT) से मंजूरी लेनी होगी।
