Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने Tata Sons बोर्ड से फिलहाल पब्लिक लिस्टिंग (IPO) से बचने की सलाह दी है। RBI द्वारा कंपनी के NBFC स्टेटस को सरेंडर करने की अर्जी खारिज होने के बाद, उन्होंने नियामकीय नियमों के तहत **3 साल** की अनुपालन अवधि (compliance window) का प्रस्ताव रखा है।
Tata Sons के लिए फिलहाल रास्ता आसान नहीं दिख रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा कंपनी के NBFC रजिस्ट्रेशन को स्वैच्छिक रूप से सरेंडर करने की अर्जी को ठुकराए जाने के बाद, बोर्ड अब अपनी अगली रणनीति पर मंथन कर रहा है।
IPO की जल्दबाजी क्यों नहीं?
Noel Tata का मानना है कि इस समय बाजार में उतरना कंपनी और शेयरधारकों, दोनों के लिए सही नहीं होगा। उन्होंने एयर इंडिया (Air India) और Tata Digital जैसी कंपनियों में चल रहे टर्नअराउंड प्रयासों और सेमीकंडक्टर-इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे बड़े निवेशों का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रोजेक्ट्स को अभी और स्थिरता की जरूरत है।
RBI के नियम और उलझन
RBI के 'अपर लेयर' (Upper Layer) NBFC फ्रेमवर्क के तहत, Tata Sons को क्लासिफिकेशन के 3 साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। ग्रुप इस अनिवार्यता से बचने के लिए NBFC का दर्जा खत्म करना चाह रहा था।
Noel Tata का क्या है सुझाव?
अगर लिस्टिंग अनिवार्य हो जाती है, तो Noel Tata ने 11 सितंबर, 2026 से नई 3 साल की अनुपालन अवधि की मांग करने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि RBI के फैसले के इंतजार में बीते 2.5 साल के समय को इस डेडलाइन में नहीं गिना जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जोर दिया है कि बोर्ड को RBI के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए और किसी भी अंतिम फैसले से पहले Tata Trusts को विश्वास में लेना चाहिए।
