Registrar of Companies (RoC) ने Tata Sons को अपनी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) आयोजित करने के लिए 31 दिसंबर, 2026 तक का समय दे दिया है। अगस्त में कोरम पूरा न हो पाने के कारण मीटिंग टल गई थी, जिससे **₹4,474 करोड़** का डिविडेंड फिलहाल अटक गया है।
कोरम की समस्या और गवर्नेंस डेडलॉक
अगस्त 2026 में हुई घटना के बाद से Tata Sons की कॉर्पोरेट गवर्नेंस चर्चा में है। कंपनी के नियमों के मुताबिक, बोर्ड मीटिंग में 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' और 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' दोनों के प्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है। लेकिन, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा सर रतन टाटा ट्रस्ट के कामकाज की जांच के चलते ट्रस्ट पर लगी पाबंदियों ने इसे एक प्रशासनिक गतिरोध में डाल दिया है।
डिविडेंड और फाइनेंशियल असर
इस देरी का सीधा असर निवेशकों की जेब पर पड़ रहा है। चूंकि AGM में ही फाइनेंशियल ईयर 2026 के अकाउंट्स को मंजूरी मिलती है, इसलिए मीटिंग न हो पाने के कारण ₹4,474 करोड़ का डिविडेंड अभी तक शेयरधारकों तक नहीं पहुंच पाया है।
उत्तराधिकारी की तलाश और अनिश्चितता
वित्तीय मसलों के अलावा, यह स्थिति भविष्य के नेतृत्व (Succession Planning) को लेकर भी धुंध पैदा कर रही है। N Chandrasekaran ने साफ कर दिया है कि वे चेयरमैन के तौर पर तीसरा कार्यकाल नहीं लेंगे, और उनका मौजूदा टेन्योर फरवरी 2027 में खत्म हो रहा है। AGM में देरी होने की वजह से उस सिलेक्शन कमेटी का गठन भी औपचारिक रूप से नहीं हो पा रहा है, जो अगले चेयरमैन के नाम पर मुहर लगा सके। मार्केट की नजरें अब चैरिटी कमिश्नर की जांच के नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि उसी के बाद ही चीजें सामान्य हो पाएंगी।
