नई कंपनियों में बढ़ता घाटा
मंगलवार को हुई Tata Sons की बोर्ड मीटिंग में नई बिजनेस सेगमेंट्स में तेजी से हो रहे कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को लेकर चिंता जताई गई। TCS और Tata Motors जैसी लिस्टेड कंपनियों से अच्छी कमाई तो हो रही है, लेकिन अनलिस्टेड पोर्टफोलियो एक बड़ी चिंता बन गया है। इन वेंचर्स (Ventures) में घाटा फाइनेंशियल ईयर 2020 (FY20) के ₹1,557 करोड़ से बढ़कर FY25 तक ₹10,905 करोड़ से अधिक हो गया है। अनुमान है कि FY26 तक यह घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुँच सकता है, जिसका मुख्य कारण एयर इंडिया (Air India) का बेड़ा आधुनिकीकरण और टाटा डिजिटल (Tata Digital) की ऑपरेशनल कमियां हैं।
रेगुलेटरी जांच और लिस्टिंग का दबाव
RBI द्वारा 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी' (NBFC) के तौर पर वर्गीकृत Tata Sons को कड़े गवर्नेंस नियमों का सामना करना पड़ रहा है। NBFC का दर्जा खत्म करने के प्रयासों के बावजूद, RBI के हालिया स्पष्टीकरणों के अनुसार कंपनी आसानी से अनुपालन से बच नहीं सकती। टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद, प्रॉक्सी एडवाइजर्स (Proxy Advisors) और कुछ डायरेक्टर्स (Directors) के लिए पब्लिक लिस्टिंग (Public Listing) RBI के नियमों को पूरा करने और गवर्नेंस (Governance) के सवालों को हल करने का एक आवश्यक कदम माना जा रहा है।
बोर्डरूम में मतभेद
चेयरमैन N. Chandrasekaran के नेतृत्व वाले एग्जीक्यूटिव मैनेजमेंट (Executive Management) और Noel Tata जैसे बोर्ड मेंबर्स (Board Members) के बीच मतभेद हैं। Chandrasekaran ने नए क्षेत्रों में आक्रामक विकास को बढ़ावा दिया है, लेकिन प्रॉफिटिबिलिटी टाइमलाइन (Profitability Timelines) और कैपिटल डिप्लॉयमेंट एफिशिएंसी (Capital Deployment Efficiency) पर सवाल बने हुए हैं। बोर्ड को अब दीर्घकालिक रणनीति और तत्काल वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना होगा, और मैनेजमेंट का इन प्रतिस्पर्धी मांगों से निपटना ग्रुप के भविष्य को आकार देगा।
भविष्य की रणनीति और जोखिम
ग्रुप की भविष्य की रणनीति स्थापित व्यवसायों से मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) पर निर्भर करती है, जो उच्च-विकास वाले, घाटे वाले वेंचर्स को फंड करेंगे। TCS जैसी कंपनियों से डिविडेंड (Dividend) में मंदी आने पर कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) के कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं। लीडरशिप स्टेबिलिटी (Leadership Stability) भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि चेयरमैन के पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया बातचीत का बिंदु बन गई है, जो ग्रुप की स्पष्ट रणनीतिक दिशा बनाए रखने की क्षमता पर जोर देती है। मार्केट को अधिक पारदर्शिता या कैपिटल-इंटेंसिव यूनिट्स (Capital-intensive Units) के पुनर्गठन के संकेतों का इंतजार रहेगा।
