Reserve Bank of India (RBI) ने Tata Sons की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें कंपनी ने 'Core Investment Company' स्टेटस छोड़ने की मांग की थी। अब कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य हो सकता है, जिस पर फैसला **17 सितंबर** को होने वाली बोर्ड मीटिंग में लिया जाएगा।
RBI के इस कड़े रुख के बाद Tata Sons एक बड़े चौराहे पर खड़ा है। रेगुलेटर के 11 सितंबर के फैसले के बाद कंपनी अब 'Upper Layer NBFC' के दायरे में बनी रहेगी, जिसके तहत शेयर बाजार में लिस्टिंग करना एक अनिवार्य प्रक्रिया बन गई है।
बोर्ड मीटिंग और आगे की रणनीति
कंपनी के बोर्ड की मीटिंग 17 सितंबर, 2026 को बुलाई गई है। नोएल टाटा के नेतृत्व में Tata Trusts इस बात पर विचार कर रही है कि क्या केंद्रीय बैंक से इस फैसले के पीछे का विस्तृत कारण पूछा जाए। हालांकि, बोर्ड और स्टेकहोल्डर्स, जैसे कि Shapoorji Pallonji Group, के बीच इस मामले को लेकर अलग-अलग राय है। शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप लंबे समय से लिस्टिंग का समर्थक रहा है ताकि उन्हें अपने स्टेक से लिक्विडिटी मिल सके।
कानूनी दांव-पेंच
इस मामले में रेगुलेटरी तनाव काफी बढ़ गया है। RBI ने किसी भी संभावित कानूनी चुनौती को भांपते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक 'Caveat' दाखिल कर दिया है। इसका मतलब है कि कोर्ट कोई भी आदेश देने से पहले रेगुलेटर का पक्ष जरूर सुनेगा।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
इस खबर के बाद Tata Chemicals जैसे ग्रुप के शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखा गया है। बाजार इस घटना को 'वैल्यू अनलॉकिंग' के नजरिए से देख रहा है, लेकिन अभी तक लिस्टिंग को लेकर कोई आधिकारिक टाइमलाइन सामने नहीं आई है। इसके अलावा, कंपनी में लीडरशिप बदलाव भी चर्चा का विषय है, क्योंकि चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद न संभालने का संकेत दिया है।
फिलहाल, निवेशकों की नजरें 17 सितंबर की बैठक पर टिकी हैं कि कंपनी इस मामले को आगे कैसे ले जाती है।
