Tata Sons ने Air India में **₹10,000 करोड़** का कैपिटल इन्फ्यूजन करने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, यह पैसा बिना शर्त नहीं मिलेगा, क्योंकि एयरलाइन पर बढ़ते कर्ज और फाइनेंशियल ईयर 2026 में हुए भारी नुकसान ने कंपनी के मैनेजमेंट को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons ने Air India में ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की पूंजी डालने का फैसला किया है। यह कदम एयरलाइन के कायापलट की दिशा में बड़ा निवेश माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही पैरेंट कंपनी ने कड़ी शर्तें जोड़ दी हैं। अब एयर इंडिया को मिलने वाली फंडिंग के हर हिस्से के लिए विस्तृत बिजनेस प्लान सबमिट करना होगा, जो सीधे तौर पर कंपनी की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश है।
घाटे का बोझ और चुनौतियां
यह निवेश ऐसे वक्त में आया है जब एयरलाइन को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में Air India का नेट लॉस बढ़कर ₹22,238 करोड़ पहुंच गया है, जो पिछले साल के ₹10,859 करोड़ के घाटे से दोगुना है। बढ़ते घाटे को देखते हुए टाटा ग्रुप अब अपनी रणनीति बदल रहा है और बिना सोचे-समझे पैसा लगाने के बजाय परफॉरमेंस पर जोर दे रहा है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियम
फंडिंग की यह नई रणनीति रेगुलेटरी वजहों से भी तय की गई है। Tata Sons फिलहाल RBI के 'Core Investment Companies' के नियमों के दायरे में है। 'Upper Layer' की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के सख्त नियमों के कारण टाटा संस अब अपनी सब्सिडियरी कंपनियों के लिए आसानी से फाइनेंशियल गारंटी नहीं दे सकती। इसके चलते अब कंपनी को सीधे और सशर्त कैश सपोर्ट देना पड़ रहा है। एयरलाइन पर फिलहाल करीब ₹40,000 करोड़ का कुल कर्ज है, जिसमें State Bank of India का सबसे ज्यादा ₹18,500 करोड़ और Bank of Baroda का ₹5,938 करोड़ का एक्सपोजर है।
लीडरशिप में बड़ा बदलाव
एयरलाइन के लिए यह टर्नअराउंड प्लान एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन के बीच चल रहा है। Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran फरवरी 2027 में पद से हट जाएंगे। इस बड़े बदलाव के कारण ग्रुप के निवेशों को लेकर बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। अब निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या एयरलाइन इस नई पूंजी का सही इस्तेमाल करके अपने घाटे को कम कर पाएगी और लेंडर्स व पेरेंट कंपनी की उम्मीदों पर खरी उतरेगी या नहीं।
